बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे
सज धज के घर मेरे आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे,
शेर सवार होके आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे...
चंदा के जैसी बिंदिया है माँ की नाक की नथनी तारो के जैसी,
कानो में झुमके हाथो में चूड़ागले में हार साजे नैनो में कजरा,
सोलह श्रृंगार करके आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे...
हाथो में मेहँदी शस्त्र सजाये शेर पे बैठी मैया मुस्काये,
पेरो में पायल छन छन बजेगी मैया सभी के संकट हरेगी,
दर्शन देने आज आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे....
लाल चुनरिया सर पे सजा के सिंह पे सवार हो आयी गुफा से,
मैया के चरणों से शीश झुका के राजीव हुआ धन्य दर्शन पाके,
झोली सभी की भरने आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे....
श्रेणी : दुर्गा भजन
बड़ी प्यारी लागे | Badi Pyari Laage | Rajiv Krishan Gandhi | Navrate Mata Bhajan 2021
“बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे” एक सुंदर और भावपूर्ण दुर्गा भजन एवं नवरात्रि माता भजन है, जिसमें भक्त मां दुर्गा के सजे-धजे और दिव्य स्वरूप के दर्शन करके उनकी सुंदरता का वर्णन करता है। भजन की मुख्य पंक्ति “सज धज के घर मेरे आयी है माँ, बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे” माता के भक्त के घर आगमन की आनंदमयी कल्पना प्रस्तुत करती है। इसमें माता के प्रति प्रेम, श्रद्धा, उत्साह और उनके दर्शन से मिलने वाली प्रसन्नता का भाव दिखाई देता है।
भजन के पहले अंतरे में माता के सोलह श्रृंगार का बहुत सुंदर वर्णन मिलता है। मां के माथे की बिंदी को चंद्रमा के समान और नथनी को तारों के समान बताया गया है। कानों में झुमके, हाथों में चूड़ियां, गले में हार और आंखों में काजल जैसे श्रृंगार माता के दिव्य सौंदर्य को और निखारते हैं। भक्त की दृष्टि में माता केवल सुंदर रूप में ही नहीं, बल्कि प्रेम और करुणा से भरी हुई अपनी जननी के रूप में घर में पधारी हैं।
आगे माता के मेहंदी, शस्त्र और सिंह पर सवार स्वरूप का वर्णन आता है। माता के पैरों में पायल की छन-छन और चेहरे पर मुस्कान उनके सुंदर तथा मनमोहक स्वरूप को दर्शाती है। साथ ही “मैया सभी के संकट हरेगी” कहकर उनके शक्ति और रक्षक स्वरूप को भी सामने रखा गया है। यहां माता का श्रृंगार केवल सौंदर्य का विषय नहीं रहता, बल्कि उनके भक्तों की रक्षा और उनके दुखों को दूर करने वाली शक्ति से भी जुड़ जाता है।
भजन में लाल चुनरिया और सिंह की सवारी का विशेष उल्लेख है। लाल चुनरी माता के पारंपरिक श्रृंगार और शक्ति स्वरूप की सुंदर छवि प्रस्तुत करती है। सिंह पर सवार होकर गुफा से माता का आगमन भक्तों के लिए अत्यंत आनंद और उत्साह का अवसर बन जाता है। यह दृश्य माता के उस स्वरूप को दर्शाता है जिसमें वे एक ओर वात्सल्य से भरी हुई जननी हैं, तो दूसरी ओर अपने शस्त्रों के साथ अधर्म और संकटों का नाश करने वाली शक्ति भी हैं।
अंतिम अंतरे में “मैया के चरणों से शीश झुका के राजीव हुआ धन्य दर्शन पाके” के माध्यम से भक्त के समर्पण और कृतज्ञता का भाव व्यक्त होता है। माता के चरणों में शीश झुकाना हिंदू भक्ति परंपरा में विनम्रता और शरणागति का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद “झोली सभी की भरने आयी है माँ” की पंक्ति माता को अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली और उनकी झोली खुशियों से भरने वाली करुणामयी मां के रूप में प्रस्तुत करती है।