शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ
शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ, शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ ।
पग पग ठोकर खाऊं, चल ना पाऊं,
कैसे आऊं मैं घर तेरे ॥
हाथ पकड़ ले हाथ बढ़ा दे, अपने मंदिर तक पहुंचा दे ।
सर पर दुःख की रैना, नाही चैना,
प्यासे नैना दर्शन के ॥
जग में जिसका नाम है जीवन,
इक युग है संग्राम है जीवन ।
तेरा नाम पुकारा, दुःख का मारा,
हारा माँ इस जीवन से ॥
तेरे द्वारे जो भी आया, उसने जो माँगा वो पाया ।
मैं भी तेरा सवाली, शक्तिशाली शेरों वाली माँ जगदम्बे ॥
श्रेणी : दुर्गा भजन
Shakti De Maa | Chandrashekhar Gadgil | Ashanti | R D Burman | Rajesh Khanna
“शक्ति दे माँ शक्ति दे माँ” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें भक्त मां जगदम्बे से जीवन के संघर्षों का सामना करने के लिए शक्ति, सहारा और आगे बढ़ने का सामर्थ्य मांगता है। भजन की मुख्य पंक्ति “शक्ति दे माँ” भक्त की सीधी और विनम्र प्रार्थना है। यहां भक्त अपनी कमजोरी को स्वीकार करते हुए माता से अपने जीवन की कठिन राह पर चलने के लिए शक्ति देने की गुहार लगाता है।
भजन की शुरुआत में भक्त कहता है कि वह पग-पग पर ठोकर खा रहा है और आगे चल पाने में असमर्थ महसूस कर रहा है। “कैसे आऊं मैं घर तेरे” में माता के मंदिर तक पहुंचने की लालसा और अपनी असहाय स्थिति दोनों दिखाई देती हैं। इसके बाद वह माता से हाथ पकड़ने और अपने मंदिर तक पहुंचाने की प्रार्थना करता है। यह केवल मंदिर तक पहुंचने की इच्छा नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में माता के मार्गदर्शन और सहारे की प्रतीकात्मक प्रार्थना भी है।
अगली पंक्तियों में भक्त अपने जीवन की पीड़ा और दर्शन की लालसा व्यक्त करता है। “सर पर दुःख की रैना, नाहीं चैना, प्यासे नैना दर्शन के” में दुख भरी रात और बेचैन मन की तस्वीर दिखाई देती है। भक्त की आंखें माता के दर्शन के लिए तरस रही हैं और वह अपने कष्टों के बीच केवल मां का नाम लेकर उनसे सहायता मांगता है। इस हिस्से में भक्ति के साथ विरह और मानसिक व्याकुलता का भाव भी दिखाई देता है।
भजन जीवन को संघर्ष और संग्राम के रूप में प्रस्तुत करता है। भक्त कहता है कि संसार में जीवन का नाम है, लेकिन यह जीवन एक युग के संघर्ष जैसा प्रतीत होता है। ऐसे समय में वह मां का नाम पुकारता है और स्वयं को दुखों से हारा हुआ बताता है। यहां माता का स्मरण भक्त के लिए निराशा के बीच उम्मीद और मनोबल का सहारा बन जाता है। “शक्ति दे मां” की पुनरावृत्ति इसी विश्वास को मजबूत करती है कि कठिन परिस्थितियों में भीतर से मजबूत होने के लिए माता की कृपा आवश्यक है।