राम जी के नाम का हो कीर्तन जहा
राम जी के नाम का हो कीर्तन जहा,
लगता पहरा हनुमान का वहा,
राम जी के नाम की ओड़ी चदरियाँ,
राम जी के चरणों में इनका जहां,
लगता पहरा हनुमान का वहा,
राम जी की भक्ति में डुभे ये रहते,
रामजी का भक्त कोई इनसे कहा,
लगता पहरा हनुमान का वहा,
राम जी का याहा याहा गूंजे जैकारा,
नाचत मिलेंगे हनुमान वहा,
लगता पहरा हनुमान का वहा,
चीर के सीना दर्शन कराया,
राम सियां वस्ते में याहा,
लगता पहरा हनुमान का वहा,
श्रेणी : राम भजन
मंगलवार स्पेशल || राम जी के नाम का हो कीर्तन जहा || Ram Ji Ke Naam Ka Ho Kirtan Jahan
यह “राम जी के नाम का हो कीर्तन जहाँ” एक भक्तिमय राम भजन है, जिसमें भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम और भक्ति को दर्शाया गया है। भजन का मुख्य भाव यह है कि जिस स्थान पर श्रीराम का नाम लेकर कीर्तन और जयकारा होता है, वहाँ हनुमान जी की उपस्थिति और कृपा अवश्य मानी जाती है। “लगता पहरा हनुमान का वहाँ” पंक्ति के माध्यम से भक्त यह विश्वास व्यक्त करता है कि हनुमान जी अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के नाम और भक्तों की रक्षा करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
इस भजन का मुख्य भाव श्रीराम के प्रति प्रेम, हनुमान जी की अनन्य भक्ति और प्रभु के नाम की महिमा है। इसमें हनुमान जी को ऐसे भक्त के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनका जीवन पूरी तरह श्रीराम की भक्ति में समर्पित है। “राम जी की भक्ति में डूबे ये रहते” जैसी पंक्ति हनुमान जी की उस अनन्य भक्ति को दर्शाती है, जिसमें उनके लिए श्रीराम ही सब कुछ हैं। भजन में यह भी कहा गया है कि सच्चा राम भक्त हनुमान जी जैसा समर्पण और प्रेम रखने वाला होता है।
भजन में राम नाम के कीर्तन और जयकारे का विशेष महत्व बताया गया है। जहाँ श्रीराम का नाम गूंजता है और भक्त मिलकर जयकारा लगाते हैं, वहाँ हनुमान जी के नृत्य और उनकी उपस्थिति की कल्पना की गई है। यह भाव भक्तों के मन में उत्साह और श्रद्धा उत्पन्न करता है। “नाचत मिलेंगे हनुमान वहाँ” के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि हनुमान जी अपने प्रभु का नाम सुनकर आनंदित होते हैं और राम नाम के कीर्तन में भाव-विभोर हो जाते हैं।
अंतिम पंक्ति “चीर के सीना दर्शन कराया, राम सिया वसे हैं यहाँ” हनुमान जी की प्रसिद्ध भक्ति भावना की ओर संकेत करती है। धार्मिक कथाओं में हनुमान जी के हृदय में श्रीराम और माता सीता के निवास का भाव उनकी अनन्य भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस पंक्ति के माध्यम से भजन यह संदेश देता है कि सच्चे भक्त के हृदय में भगवान का निवास होता है और हनुमान जी की भक्ति हमें निष्काम सेवा, समर्पण और प्रभु के नाम का निरंतर स्मरण करने की प्रेरणा देती है।