हेलो हाए छोड़के जय माता दी बोल
हेलो हाए छोड़के जय माता दी बोल,
जय माता की बोल कोई लागे नही मोल,
हेलो हाए छोड़के जय माता दी बोल,
जय माता की बोल कोई लागे नही मोल...
जय माता की बोलने से किस्मत जगे,
मन होवे साफ ध्यान माँ का लगे,
भीतर की प्यारे किवाड़िया तू खोल,
जय माता की बोल कोई लागे नही मोल....
जय माता की बोलिये उठाओ जब फोन,
इसकी बराबरी करेगा शब्द कौन,
इसमें ना करने पड़े गी नापतोल,
जय माता की बोल कोई लागे नही मोल....
मईया का जयकारा मिश्री की डली,
सुन के जयकारा मईया आती चली,
वाणी में अपने तू प्यारे मिश्री तू घोल,
जय माता की बोल कोई लागे नही मोल....
जयकारा वो बोल गूँजे धरती आकाश,
जयकारे से होवे माँ के हृदय में वास,
आसन से अपने तू भूलन ना डोल,
जय माता की बोल कोई लागे नही मोल....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Navratri Special 2022 | Hello Haye Chod Ke Jai Mata Di Bol | Harish Magan Ke Bhajan | जय माता दी बोल
यह “हेलो हाए छोड़के जय माता दी बोल” एक उत्साहपूर्ण और सरल दुर्गा भजन तथा नवरात्रि विशेष माता रानी का भजन है, जिसमें भक्तों को आधुनिक अभिवादन और सांसारिक बातों को छोड़कर प्रेम से “जय माता दी” बोलने के लिए प्रेरित किया गया है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि माता का जयकारा लगाने के लिए किसी विशेष धन या साधन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा से माता का नाम लेना ही पर्याप्त है। “जय माता की बोल कोई लागे नहीं मोल” पंक्ति इसी भाव को दर्शाती है कि माँ का नाम लेना अमूल्य है और इसके लिए किसी कीमत की आवश्यकता नहीं है।
इस भजन का मुख्य भाव माता के नाम का स्मरण, सकारात्मक सोच, भक्ति और जयकारे की महिमा है। इसमें कहा गया है कि जब व्यक्ति प्रेम और श्रद्धा से “जय माता दी” बोलता है, तो उसके मन में भक्ति का भाव जागता है और उसका ध्यान माता की ओर लगने लगता है। “मन होवे साफ ध्यान माँ का लगे” के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि माता का नाम लेने से मन को शांति और सकारात्मकता मिल सकती है। वहीं “भीतर की प्यारे किवाड़िया तू खोल” पंक्ति भक्त को अपने भीतर के आध्यात्मिक द्वार खोलने और सच्ची भक्ति को हृदय में स्थान देने की प्रेरणा देती है।
भजन की एक खास विशेषता यह है कि इसमें फोन उठाते समय “हेलो” या “हाय” कहने के बजाय “जय माता दी” बोलने की प्रेरणा दी गई है। यह भाव आधुनिक जीवनशैली को भक्ति से जोड़ने का एक सरल और रोचक तरीका है। भजन के अनुसार माता का जयकारा इतना मधुर है कि वह मिश्री की डली के समान मीठा लगता है। जब भक्त मिलकर माता का जयकारा लगाते हैं, तो वातावरण भक्तिमय हो जाता है और हर ओर माता की शक्ति और भक्ति का अनुभव होने लगता है।
भजन के अंतिम हिस्से में माता के जयकारे को धरती और आकाश तक गूंजने वाला बताया गया है। इसका भाव यह है कि जब भक्त सच्चे मन से माता का नाम लेते हैं और जयकारा लगाते हैं, तो उनके भीतर माता के प्रति प्रेम और श्रद्धा और भी गहरी होती जाती है। इस प्रकार यह भजन केवल माता का नाम लेने की प्रेरणा नहीं देता, बल्कि भक्तों को अपने दैनिक जीवन में भी भक्ति, सकारात्मकता और माता के स्मरण को बनाए रखने का संदेश देता है।