रण में आयी देखो काली
रण में आयी देखो काली,
खून से भरने खप्पर खाली,
दुष्टो को तू मारने वाली,
जय काली काली....
अष्ट भुजाओं वाला लहंगा,
पहन के मैया आई है,
काट के दुष्टो का सर मैया,
ने माला बनाई है,
चंडी रूप बात निराली,
सजती है मेरी मैया काली,
दुष्टो को तू मारने वाली,
जय काली काली.....
देख के रूप विराट माँ तेरा,
कई देवता भी हारे,
तेरे आगे विनती करते,
हाथ जोड़ते है सारे,
आखिर में शिव शंकर जी ने,
किया है शांत तुझे माँ काली,
दुष्टो को तू मारने वाली,
जय काली काली.....
जैसे भैरव बाबा की,
मुक्ति की तूने अम्बे माँ,
महिषासुर को सबक सिखाने,
वाली तू जगदम्बे माँ,
ऐसे ही ‘आशीष बागड़ी’,
चरणों में तेरे आया माँ,
‘हेमंत ब्रजवासी’ ने मैया,
तेरा ही गुण गाया माँ,
खुशियों सबको देने वाली,
जय काली काली....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Jai Kaali Jai Kaali | रण में आयी देखो काली खून से भरने खप्पर वाली | Hemant Brijwasi | Navratri Song
“रण में आयी देखो काली” एक जोशीला और शक्तिशाली माँ काली / दुर्गा भजन है, जिसमें माँ काली के उग्र, वीर और रौद्र स्वरूप का वर्णन किया गया है। भजन में माँ को रणभूमि में उतरकर दुष्टों और अधर्म का नाश करने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। “रण में आयी देखो काली, खून से भरने खप्पर खाली” जैसी पंक्तियाँ माँ के उस भयंकर स्वरूप को दर्शाती हैं, जो बुराई और अत्याचार का अंत करने के लिए प्रकट होता है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब संसार में अधर्म और दुष्टता बढ़ती है, तब देवी शक्ति उसका विनाश करने के लिए अपना प्रचंड रूप धारण करती हैं।
इस भजन का मुख्य भाव शक्ति, वीरता, अधर्म पर धर्म की विजय और माँ काली की आराधना है। इसमें माँ को अष्टभुजा धारण करने वाली, चंडी स्वरूप और दुष्टों का संहार करने वाली देवी के रूप में चित्रित किया गया है। भजन के अनुसार माँ दुष्टों का वध करके उनके सिरों की माला धारण करती हैं। यह वर्णन देवी के उस पौराणिक और प्रतीकात्मक रूप को दर्शाता है, जिसमें माँ काली अहंकार, अत्याचार और नकारात्मक शक्तियों का अंत करने वाली शक्ति का प्रतीक हैं।
आगे भजन में माँ के विराट और भयंकर स्वरूप का वर्णन मिलता है। माँ के इस रौद्र रूप को देखकर देवता भी भयभीत और चिंतित हो जाते हैं तथा उनके सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं। भजन में यह भी कहा गया है कि अंत में भगवान शिव माँ काली के प्रचंड रूप को शांत करते हैं। यह प्रसंग देवी काली की शक्ति और भगवान शिव के साथ उनके संबंध को दर्शाने वाली प्रसिद्ध धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। इसका भाव यह है कि देवी की शक्ति अत्यंत प्रचंड है, लेकिन वह शक्ति अंततः धर्म और सृष्टि के संतुलन की रक्षा के लिए ही कार्य करती है।
भजन में भैरव बाबा और महिषासुर का भी उल्लेख मिलता है। माँ को ऐसी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो दुष्ट शक्तियों का नाश करके संसार को भय और संकट से मुक्त करती हैं। महिषासुर का वध देवी की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रमुख प्रतीक है। इसी कारण माँ दुर्गा और काली की उपासना में शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का विशेष महत्व माना जाता है।
अंतिम अंतरे में “आशीष बागड़ी” और “हेमंत ब्रजवासी” के नामों का उल्लेख मिलता है। उपलब्ध गीत के पाठ और दिए गए वीडियो शीर्षक के आधार पर यह भजन हेमंत ब्रजवासी की प्रस्तुति से जुड़ा हुआ दिखाई देता है, जबकि आशीष बागड़ी का नाम गीत के बोलों में आता है। हालांकि केवल उपलब्ध पाठ के आधार पर यह निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा कि इनमें से कौन मूल गीतकार है और कौन अन्य भूमिका में है।
कुल मिलाकर, “रण में आयी देखो काली” माँ काली के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप की स्तुति करने वाला एक दुर्गा भजन है। इसमें माँ को दुष्टों का संहार करने वाली, भक्तों की रक्षा करने वाली और अधर्म का अंत करने वाली आदिशक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भजन का आध्यात्मिक संदेश यह है कि जब भी संसार में बुराई और अन्याय बढ़ता है, तब देवी शक्ति धर्म और सत्य की रक्षा के लिए प्रकट होती है। माँ काली का यह स्वरूप भक्तों के लिए भय का नहीं, बल्कि साहस, सुरक्षा और बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है।