शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये,
री मैया रानी आ जाइये जय हो,
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये....
तेरे नाम की माँ ज्योत जगाई,
नारियल चुनडी माँ तेरे पे चढ़ाई,
तेरी हो रही जय जय कार मैया रानी आ जाइये,
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये,
री मैया रानी आ जाइये....
लाल लाला चोला मैया तेरा री मंगाया,
हलवा पूरी का भोग लगाया,
तुम आके करो स्वीकार मैया रानी आ जाइये,
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये,
री मैया रानी आ जाइये....
तेरी दर्शन की माँ आस लगाई,
साच्ची राह माँ तनै री दिखाई,
तू कर दे बेड़ापार री मैया रानी आ जाइये,
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये,
री मैया रानी आ जाइये....
‘सिमरन राठोर’ महिमा री गारी,
तेरी शरण मैं आना चाहरी,
तेरी शक्ति अपरम्पार मैया रानी आ जाइये,
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये,
री मैया रानी आ जाइये.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
नवरात्रि भजन▹शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये | Durga Maa Ka Bhajan | Mata Bhajan |Navratri Bhajan
यह “शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये” एक भक्तिमय दुर्गा भजन और नवरात्रि भजन है, जिसमें भक्त माता रानी से शेर पर सवार होकर अपने भक्तों के बीच आने और उन्हें दर्शन देने की प्रार्थना करता है। भजन की शुरुआत ही माता के दिव्य स्वरूप के स्मरण से होती है, जिसमें माँ दुर्गा को सिंहवाहिनी के रूप में पुकारा गया है। भक्त ने माता के नाम की ज्योत जलाई है, नारियल और चुनरी चढ़ाई है और उनके स्वागत में जयकारे लगाए हैं। इस भजन में भक्त की यह भावना दिखाई देती है कि जब माता रानी स्वयं उसके दरबार में आएंगी, तो उसका जीवन धन्य और सफल हो जाएगा।
इस भजन का मुख्य भाव माता रानी के प्रति श्रद्धा, प्रेम, भक्ति, विश्वास और दर्शन की लालसा है। भक्त माता के लिए लाल चोला मंगवाता है और हलवा-पूरी का भोग लगाकर उनसे उसे स्वीकार करने की विनती करता है। यहाँ पूजा की ये सभी वस्तुएँ भक्त की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक हैं। भक्त के मन में माता के दर्शन की गहरी इच्छा है और वह उनसे सही मार्ग दिखाने तथा जीवन की कठिनाइयों से पार लगाने की प्रार्थना करता है। “तू कर दे बेड़ापार” जैसी पंक्ति में भक्त का पूर्ण विश्वास दिखाई देता है कि माँ की कृपा से उसके जीवन के सभी संकट दूर हो सकते हैं।
भजन में माता की अपार शक्ति और उनकी शरण में जाने का भाव भी प्रमुखता से दिखाई देता है। भक्त स्वयं को माता की शरण में समर्पित करते हुए कहता है कि उसकी सबसे बड़ी इच्छा माँ के चरणों में स्थान पाना है। अंतिम अंतरे में “सिमरन राठोर” नाम का उल्लेख मिलता है, जिससे संकेत मिलता है कि यह नाम रचना या प्रस्तुति से जुड़े व्यक्ति का हो सकता है। हालांकि, उपलब्ध विवरण के आधार पर इसके मूल गीतकार या रचनाकार की स्वतंत्र रूप से पुष्टि स्पष्ट नहीं है, इसलिए निश्चित रूप से लेखक का नाम बताना उचित नहीं होगा।