सजा दो घर को कलियों से बृज में लिरिक्स Saja Do Ghar Ko Kaliyon Se Brij Mein Lyrics Krishna Bhajan
सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं,
बृज में श्याम आए हैं, मेरे घनश्याम आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,
सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं....
पखारो इनके चरणों को बहाकर प्रेम की गंगा,
निहारो इनके नैनो को जगी है प्रीत की आशा,
जगी है प्रीत की आशा जगी है प्रीत की आशा,
बिछा दो राह में पलकें मेरे घनश्याम आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,
सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं....
तेरी एक झलक पाने को जगत सारा ही है पागल,
आएगा जग का रखवाला खुशी में दिल हुआ घायल,
खुशी में दिल हुआ घायल,
जलाओ दीप घर-घर में मेरे घनश्याम आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,
सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं....
तेरी आहट से है वाफीक़ तेरे चेहरे की है दरकार,
बिना देखे ही कह देंगे लो आ गए हैं मेरे सरकार,
लो आ गए हे मेरे सरकार,
बहारो फूल बरसा दो मेरे घनश्याम आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,
सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं....
आस है सबके ही दिल में मेरे नंदलाल आएंगे,
हमारे मोह माया के यह बंधन को छोड़ आएंगे,
यह बंधन को छोड़ आएंगे,
हैं दासी शर्मा की आशा मेरे नंदलाल आएंगे,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,
सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं....
श्रेणी : कृष्ण भजन
।। सजा दो घर को कलियों से बिरज में श्याम आए हैं ।। SAJA DO GHAR KO KALIYO SE BRAJ ME SHYAM AYE HAI।।
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