लिखो राम का नाम
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम,
लिखो राम को नाम या पे लिखो राम को नाम,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
नीचे से हो मैया बोली सुन बानर मेरी बात,
किसके तुम लाल कहाये कहा तुम्हारो नाम,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
ऊपर से वो हनुमत बोले सुन मैया मेरी बात,
मात अंजनी पिता पवन हनुमत हमरो नाम,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
नीचे से वो मैया सुन हनुमत मेरी बात,
किसके तो तुम भेजें आए कहां तुम्हारा काम,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
ऊपर से श्री हनुमत बोले सुन मैया मेरी बात,
रामचंद्र के भेजे आए सेवा हमारा काम,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
ऊपर से वो हनुमत बोले सुन मैया मेरी बात,
बड़ी जोर की भूख लगी है खाने को कुछ नाज,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
नीचे से वो मैया बोली सुन हनुमत मेरी बात,
हरी हरी रावण की बगिया कंदमूल फल खाओ,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
कछु खाई का चित्तौड़ गिराए बगिया गई उजाड़,
रखवारी जब वर्जन लागे अच्छे दिनों मार,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
भरी सभा में हनुमत जी ने रावण दियो ललकार,
पूंछ जला के आग लगाई लंका दही जलाए,
अंगूठी मेरे पति की या पे लिखो राम का नाम....
श्रेणी : राम भजन
हनुमान जी की अद्भुत भक्ति और शक्ति का वर्णन इस लोकगीत में किया गया है। जब सीता माता की खोज में हनुमान जी लंका पहुंचे, तो उनके और राक्षसों के बीच संवाद के साथ कई घटनाएं घटीं। इस गीत में राम नाम की महिमा को उकेरा गया है, जहां सीता माता के आभूषण पर राम का नाम अंकित है।
हनुमान जी अंजनी माता के पुत्र और पवन देव के वरदान से उत्पन्न महाशक्ति हैं। उन्होंने लंका में प्रवेश कर रावण को ललकारा और अपनी पूंछ में आग लगाकर पूरी लंका को जलाकर राख कर दिया। इस गीत में रामभक्ति की सच्ची शक्ति और हनुमान जी की निडरता को दिखाया गया है। उनकी हर क्रिया रामजी की सेवा में समर्पित थी, चाहे वह रावण के बगीचे को उजाड़ना हो या भरी सभा में ललकारना। राम का नाम ही उनकी शक्ति और प्रेरणा थी।