मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया,
भरत भैया छोटे भैया,
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया.....
ले जा खड़ा हूं, इन्हें चौकी पर रखना,
राजा का फर्ज निभाना भैया,
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया.....
मात सुमित्रा विनय मेरी सुनियो,
विनय मेरी सुनियो, अरज मेरी सुनियो,
मेरे संग रहे लक्ष्मण भैया,
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया.....
मात केकई से हाथ जोड़ कहियो,
हाथ जोड़ कहियो, मेरी विनती सुनायो,
तेरा कछु ना कसूर मैया,
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया.....
माता कौशल्या को जाए समझाइयो,
जा समझाइयो मेरी विनती सुनाइयो,
चौदह बरस पीछे आमें मैया,
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया.....
अवधपुरी में जाकर कहियो,
जाकर कहियो उन्हें समझाइयो,
कर्म का लेख मिटे ना भैया,
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया.....
श्रेणी : राम भजन
मेरी ले जा खड़ाउ भरत भैया... यह भजन भगवान राम और भरत के अद्भुत संबंध को दर्शाता है। इसमें राम का अपने भाई भरत के प्रति स्नेह और भरोसे का वर्णन किया गया है। राम भरत से कहते हैं कि उनकी खड़ाऊं ले जाकर राजगद्दी पर रखें और राजा का धर्म निभाएं। माता सुमित्रा, कैकेयी, और कौशल्या से राम की विनती है कि वे इस निर्णय को स्वीकार करें। साथ ही, लक्ष्मण के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की गई है। भजन में 14 वर्षों के वनवास की बात कहते हुए अवधपुरी और परिवार के लिए राम की चिंता और प्रेम झलकता है। यह भजन त्याग, समर्पण, और धर्म के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।