ऊंचे पर्वत शंकर बसे लिरिक्स Unche Parvat Shankar Base Lyrics Shiv Bhajan
ऊंचे पर्वत शंकर बसे मै शंकर दे संग,
नी मैं मारगई नी माए एहदी नित घोटदी भंग....
ऊंचे पर्वत बरफा पैंदीया ए बर्फानी बाबा,
ना कोई ऐथे महल चोपड़ी ना कुल्ली ना ढाबा,
ए ता नित धुनिया सेके बस्मा ला वे अंग,
नी मैं मारगई नी माए एहदी नित घोटदी भंग...
लोकी बीजे कनका छोले एह ने भंग दे बूटे,
सारे भूत प्रेत ने लैंदे विच नशे दे झूठे,
भर भर बाटे पी बे भोला हो जाए मस्त मलंग,
नी मैं मारगई नी माए एहदी नित घोटदी भंग...
मैनू सपा तो डर लगता ए माला गल विच पावे,
बड़े बड़े सिंगा नंदी ते चढ़ जावे,
लोकी देखन खड़ खड़ ए नू आखन ए भोले दे रंग,
नी मैं मारगई नी माए एहदी नित घोटदी भंग....
डम डम डमरू भम भम भोला ए सारा जग गावे,
एहडी महिमा कोई न समझे न कोई समझावे,
एह तिरलोकी नाथ नी माए जटा दे विच गंग,
नी मैं मारगई नी माए एहदी नित घोटदी भंग......
श्रेणी : शिव भजन
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