घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने
वन में मच रही हाहाकार,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने,
हलचल मचा दही लव कुश ने,
वन में मच रही हाहाकार,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने....
तुम कहां के रहने वाले,
और कौन पुरुष ने पाल,
एजी तुमरे कहां पिता का नाम,
घोड़ा पकड़ लिए लव कुश ने.....
हम वन में रहने वाले,
मोनी बाल्मिक ने पाल,
एजी नहीं पता पिता का नाम,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने....
सबने मिलकर समझाए,
फिर लड़ने को सब आए,
एजी उन्होंने सबको दिया हराए,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने.....
फिर रामचंद्र जी आए,
उन्हें धनुष बाण हैं उठाएं,
एजी फिर मुनि ने रोके आए,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने.....
सीता ने उन्हें समझाया,
फिर नाम पिता का बताया,
लव कुश पिता तुम्हारे राम,
घोड़ा पकड़ लिया लव कुश ने.....
श्रेणी : राम भजन
वन में मच रही हाहाकार, जब लव कुश ने अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़ लिया। राम के अश्वमेध यज्ञ का यह घोड़ा जब वन में पहुंचा, तब लव कुश ने उसे रोक लिया। उनके इस साहस से चारों ओर हलचल मच गई। जब लोगों ने उनसे पूछा कि वे कौन हैं, तो उन्होंने बताया कि वे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहते हैं और उनके पिता का नाम नहीं जानते।
सबने उन्हें समझाने की कोशिश की, मगर लव कुश ने किसी की नहीं सुनी और युद्ध के लिए तैयार हो गए। जब कई योद्धा उन्हें हराने आए, तो लव कुश ने उन्हें पराजित कर दिया। आखिरकार भगवान राम स्वयं धनुष-बाण लेकर आए, लेकिन तभी मुनि वाल्मीकि ने हस्तक्षेप किया। सीता माता ने दोनों भाइयों को सच्चाई बताई कि उनके पिता स्वयं भगवान राम हैं। इस तरह लव कुश को अपने पिता का परिचय मिला और वन की हाहाकार समाप्त हुई।