असी बैठे ज्योत जगा के दातिये, asin baithe jyot jaga ke datiye

असी बैठे ज्योत जगा के दातिये



असीं बैठे ज्योत जगा के दातीए

मां ममता की, महक है,
मां है सूरज प्रकाश l
मां हरियाली सी लगे,
मां जीवन की आस ll

असीं बैठे, ज्योत जगा के दातीए,
मिल जा, सानू आ के ll
मिल जा, सानू आ के दातीए,
मिल जा, सानू आ के l
असीं बैठे, ज्योत जगा के दातीए...

महां रानी तेरी, शेर सवारी ll
सबको, लगती, बड़ी प्यारी ll
आज जाना, दर्शन, पा के दातीए,
मिल जा, सानू आ के l
असीं बैठे, ज्योत जगा के दातीए...

दुर्गा, मां तैनू आऊणा पैणा ll
बच्चियां, ने ए, मुड़-मुड़ कहिणा ll
तेरे चरणी, अरज, लगा के दातीए,
मिल जा, सानू आ के l
असीं बैठे, ज्योत जगा के दातीए...

तूं, बच्चियां दी, दाती मां एं ll
ममता, वाली, ठंडी छांव एं ll
इक वारी, गल नाल, ला लै दातीए,
मिल जा, सानू आ के l
असीं बैठे, ज्योत जगा के दातीए...

भगत, तेरा मां, कहे दातीए ll
बिना, तेरे ना, रहे दातीए ll
तेरे नाम, मेरे हर, सांस ने दातीए,
मिल जा, सानू आ के l
असीं बैठे, ज्योत जगा के दातीए...

अपलोडर - अनिलरामूर्ती भोपाल



श्रेणी : दुर्गा भजन



🔥नवरात्रि भजन🔥आसी बैठे ज्योत जगा के दातिये🌺🔥🌺मिलजा सानू आके💯बहुत ही प्यारा भजन🔔

"असीं बैठे ज्योत जगा के दातीए" एक बहुत ही भावपूर्ण और भक्ति से ओत-प्रोत भजन है, जो देवी दुर्गा की ममता और करुणा को व्यक्त करता है। इस भजन में मां की महिमा और उनका जीवन में महत्व उजागर किया गया है। भजन के पहले हिस्से में मां को सूरज की तरह प्रकाश देने वाली, हरियाली की तरह शांति देने वाली और जीवन की आशा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह एक गहरी भावना से भरा हुआ भजन है, जिसमें भक्त मां से अपने जीवन में रोशनी और शांति की प्रार्थना करते हैं।

भजन में "असीं बैठे ज्योत जगा के दातीए" का अर्थ है कि हम देवी की भक्ति में डूबे हुए हैं, और अब हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। यह कविता भक्तों को एकजुट करती है और उनके दिलों में मां के प्रति प्रेम और श्रद्धा को बढ़ाती है।

भजन के अगले हिस्से में महां रानी की शेर जैसी शक्तिशाली रूप में पूजा की जाती है, और यह बताया जाता है कि उनकी महिमा सभी को प्रिय लगती है। यह भक्तों के दिलों में विश्वास और भक्ति की भावना को जागृत करता है।

भजन में माता दुर्गा की ममता को विशेष रूप से उजागर किया गया है, और उनके चरणों में विश्वास रखने की बात की गई है। यह भजन नवरात्रि के दौरान मां के प्रति भक्ति और श्रद्धा को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन तरीका है।

इस भजन के लेखक अनिलरामूर्ती भोपाल जी ने इसे नवरात्रि के पर्व पर विशेष रूप से प्रस्तुत किया है, जो देवी दुर्गा की पूजा और उनके आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। यह भजन भक्तों को एक आंतरिक ज्योत और शक्ति से भर देता है, जो जीवन के संघर्षों में सहारा बनता है।

Harshit Jain

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