मेरा श्याम धणी बनाये बिगड़े काम
हारे का सहारा है बाबा,
दुखियों का सहारा है बाबा,
किस्मत के मारो की नैया,
पार लगाता है बाबा,
मेरा श्याम धणी, वो खाटूवाला श्याम,
मेरा श्याम धणी बनाये बिगड़े काम,
मेरा श्याम धणी .........
दुनिया से हार के जो भी दर पे जाता है,
मेरा खाटू वाला श्याम उसे अपनाता है,
लहराता है जब मोरछड़ी,
हर लेता है दुःख दर्द सभी,
मेरा श्याम धणी, वो खाटूवाला श्याम,
मेरा श्याम धणी बनाये बिगड़े काम,
मेरा श्याम धणी .........
बाबा की ज्योत के दर्शन जो कर लेता है,
उसके घर चल कर श्याम धणी खुद आता है,
अन्न धन की रहे ना कोई कमी,
भर देता है भण्डार सभी,
मेरा श्याम धणी, वो खाटूवाला श्याम,
मेरा श्याम धणी बनाये बिगड़े काम,
मेरा श्याम धणी .........
वो सबसे बड़ा दानी शीश का दानी है,
दुनिया में बाबा का नहीं कोई सानी है,
वो तीन बाण का धारी है,
महिमा उसकी न्यारी है,
मेरा श्याम धणी, वो खाटूवाला श्याम,
मेरा श्याम धणी बनाये बिगड़े काम,
मेरा श्याम धणी .........
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
Wo Khatu Wala Shyam Mera Shyam Dhani | Aashi Chawla Shyam Bhajan | Official Video Song
यह भजन भगवान खाटू श्याम की दया, करुणा और “हारे का सहारा” स्वरूप का अत्यंत श्रद्धापूर्ण गुणगान करता है। “मेरा श्याम धणी बनाये बिगड़े काम” एक लोकप्रिय खाटू श्याम भजन है, जिसके मूल रचयिता की प्रामाणिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यह भजन राजस्थान की श्याम भक्ति परंपरा से प्रेरित है और विभिन्न भजन गायकों द्वारा गाया जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव भगवान पर अटूट विश्वास, उनकी कृपा और संकटमोचक स्वरूप है। आरंभ की पंक्तियाँ—“हारे का सहारा है बाबा, दुखियों का सहारा है बाबा”—खाटू श्याम जी की सबसे प्रसिद्ध मान्यता को व्यक्त करती हैं। भक्त का विश्वास है कि जब संसार में सभी सहारे छूट जाते हैं, तब श्याम बाबा अपने भक्त का हाथ थामते हैं और उसे नई आशा तथा साहस प्रदान करते हैं।
भजन में “दुनिया से हार के जो भी दर पे जाता है, मेरा खाटू वाला श्याम उसे अपनाता है” के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भगवान किसी व्यक्ति का मूल्य उसकी सफलता या असफलता से नहीं, बल्कि उसके सच्चे मन और श्रद्धा से करते हैं। श्याम बाबा की शरण में आने वाला प्रत्येक भक्त उनके प्रेम और कृपा का अधिकारी माना जाता है।
“मोरछड़ी” का उल्लेख खाटू श्याम जी की पूजा-परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। भक्तों की मान्यता है कि श्याम बाबा की मोरछड़ी उनकी कृपा, संरक्षण और आशीर्वाद का प्रतीक है। जब भजन में कहा जाता है कि “लहराता है जब मोरछड़ी, हर लेता है दुःख-दर्द सभी”, तो उसका भाव यह है कि भगवान की कृपा से भक्त को मानसिक शक्ति, आशा और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का साहस मिलता है।
भजन में “ज्योत” के दर्शन, अन्न-धन की समृद्धि और “तीन बाण के धारी” जैसे उल्लेख भी आते हैं। “शीश के दानी” के रूप में खाटू श्याम जी की पहचान बर्बरीक की कथा से जुड़ी है, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश भगवान को अर्पित किया था। इसी त्याग के कारण वे आज भी भक्तों के बीच दान, करुणा और वचनपालन के प्रतीक माने जाते हैं।
कुल मिलाकर, यह भजन भगवान खाटू श्याम के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का भावपूर्ण चित्रण है। इसका संदेश है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से श्याम बाबा की शरण में आता है, उसे जीवन के संघर्षों में आध्यात्मिक संबल, धैर्य, आशा और भगवान की कृपा का अनुभव होता है। यही विश्वास इस भजन की आत्मा है।