माता गोरा के लाल तेरी महिमा अपार
।। श्री गणेश चतुर्थी भजन 2026 ।।
माता गोरा के लाल, तेरी महिमा अपार,
सबसे पहले पूजे, तुझे सारा संसार,
रिद्धि सिद्धि के, तुम हो दाता,
अपने भक्तो के, तुम हो भाग्य विधाता,
सारा जग ये करे, तेरी जय जयकार,
माता गोरा के लाल, तेरी महिमा अपार,
सबसे पहले पूजे, तुझे सारा संसार,
शिव शंकर के, तुम हो प्यारे,
मा गोरा के, तुम हो दुलारे,
सारे देव करे, तेरी जय जयकार,
माता गोरा के लाल, तेरी महिमा अपार,
सबसे पहले पूजे, तुझे सारा संसार,
दूर्वा और मोदक का, भोग लगाऊ,
रोज रोज में, तेरी आरती गाऊ,
तेरे चरणों में शीश, झुकाऊ बार बार,
माता गोरा के लाल, तेरी महिमा अपार,
सबसे पहले पूजे, तुझे सारा संसार,
दीन दुखियो के तुम, संकट मिटाते,
अपने भक्तो की तुम, लाज बचाते,
मेरी विनती भी बप्पा, करो स्वीकार,
माता गोरा के लाल, तेरी महिमा अपार,
सबसे पहले पूजे, तुझे सारा संसार,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : गणेश भजन
माता गोरा के लाल तेरी महिमा अपार, सबसे पहले पूजे तुझे सारा संसार ।। श्री गणेश चतुर्थी भजन 2026 ।।
यह “माता गोरा के लाल, तेरी महिमा अपार” एक भक्तिमय श्री गणेश भजन है, जिसे विशेष रूप से गणेश चतुर्थी 2026 के अवसर के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस भजन में भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करते हुए उन्हें माता गौरा यानी माता पार्वती के लाल और भगवान शिव के प्रिय पुत्र के रूप में स्मरण किया गया है। भजन की मुख्य पंक्ति में गणेश जी को संसार द्वारा सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक नमन किया गया है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, भक्ति, मंगलकामना और भगवान गणेश के प्रति पूर्ण विश्वास का है। भक्त गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला और अपने भक्तों के भाग्य को संवारने वाला मानकर उनकी जय-जयकार करता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और संकटों को दूर करने वाले देवता के रूप में याद करते हुए भक्त उनसे अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने और अपनी विनती स्वीकार करने की प्रार्थना करता है।
भजन में भगवान गणेश के प्रिय दूर्वा और मोदक का भी विशेष उल्लेख किया गया है। भक्त उनके लिए मोदक और दूर्वा का भोग लगाने, प्रतिदिन उनकी आरती गाने और बार-बार उनके चरणों में शीश झुकाने की भावना व्यक्त करता है। इन पंक्तियों में गणेश पूजा की पारंपरिक भक्ति और भक्त का अपने आराध्य के प्रति प्रेम और सेवा भाव दिखाई देता है।
भजन की अंतिम पंक्तियों में गणेश जी को दीन-दुखियों के संकट मिटाने वाले और भक्तों की लाज बचाने वाले बप्पा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भक्त अपनी व्यक्तिगत विनती भी उनके चरणों में रखता है और उनसे कृपा करने की प्रार्थना करता है। इस तरह पूरा भजन भगवान गणेश की महिमा, उनकी कृपा और भक्तों के प्रति उनके वात्सल्य को सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है।
इस भजन के लेखक Jay Prakash Verma, Indore हैं। भजन में भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, उनके प्रथम पूज्य स्वरूप, रिद्धि-सिद्धि के दाता और विघ्नों को दूर करने वाले बप्पा के रूप का सुंदर वर्णन किया गया है। गणेश चतुर्थी, गणेश पूजा और धार्मिक आयोजनों के अवसर पर यह भजन भक्तों के बीच भक्ति और मंगल भावना का वातावरण बनाने के लिए उपयुक्त है।
Harshit Sir,
ReplyDeleteRadhe Radhe !! , Aapke Sahyog Ke Liye Bahut Bahut Dhanyawad , Hamare Bhajano Ke Safar Ka Aap Bhi Ek Important Hissa Hai, Aapke Is Sahyog Ko Mein Hamesh Yaad Rakhuga,
Radhe Radhe !!