ओ बाबा नीम करोली ओ बाबा नीम करोली
।। हनुमान अंश का नया भजन ।।
राम को पाने घर से निकला,
राम को पाने घर से निकला, छोटा सा एक बालक,
छोटी सी उमर में बन गया, राम जी का साधक,
छोटी सी उमर में बन गया, राम जी का साधक,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
पक्षी से वो बातें करता, पेड़ों की बातें हैं सुनता,
पक्षी से वो बातें करता, पेड़ो की बातें हैं सुनता,
कोई कहता हनुमान अंश, कोई राम भक्त हैं कहता,
कोई कहता हनुमान अंश, कोई राम भक्त हैं कहता,
राम की भक्ति में वो तो, राम की भक्ति में वो तो,
हर पल डूबा रहता,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
हनुमान के जैसी शक्ति, हनुमान सा बल,
हनुमान के जैसी शक्ति, हनुमान सा बल,
हनुमान के जैसा ही, जीवन उसका निर्मल,
हनुमान के जैसा ही, जीवन उसका निर्मल,
अपने भक्तों का पढ़ लेता, अपने भक्तों का पढ़ लेता,
वो आने वाला कल,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
कैची धाम में की तपस्या, वृन्दावन में ली समाधि,
कैची धाम में की तपस्या, वृन्दावन में ली समाधि,
बृज में उसने जनम लिया और बृज में देह त्यागी,
बृज में उसने जनम लिया और बृज में देह त्यागी,
कान्हा की गोदी में सोकर, कान्हा की गोदी में सोकर,
बन गए वो बड़भागी,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली,
Lyrics by - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : हनुमान भजन
हनुमान अंश का नया भजन ।। ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली ।। #hanumanansh #neemkarolibaba #hanuman
यह “ओ बाबा नीम करोली, ओ बाबा नीम करोली” एक श्रद्धापूर्ण हनुमान भजन है, जिसमें प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा को श्रीराम के परम भक्त और हनुमान जी के अंश के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया गया है। भजन में बाबा के जीवन को रामभक्ति, तपस्या, सरलता और भक्तों के प्रति करुणा से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। शुरुआत में एक ऐसे बालक का वर्णन मिलता है जो छोटी उम्र से ही श्रीराम को पाने और उनकी भक्ति करने के मार्ग पर चल पड़ा तथा आगे चलकर राम जी का साधक बन गया।
इस भजन का मुख्य भाव श्रीराम भक्ति, हनुमान भक्ति, संत-श्रद्धा और गुरु के प्रति समर्पण का है। बाबा नीम करोली के बारे में भजन में कहा गया है कि वे पक्षियों और पेड़ों से भी आत्मीयता रखते थे तथा उनका जीवन प्रकृति और आध्यात्मिकता से गहराई से जुड़ा हुआ था। “कोई कहता हनुमान अंश, कोई राम भक्त है कहता” जैसी पंक्तियां बाबा के प्रति भक्तों में प्रचलित श्रद्धा और उनकी आध्यात्मिक छवि को व्यक्त करती हैं। यहां “हनुमान अंश” एक भक्तिपरक मान्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
भजन के अगले भाग में बाबा की तुलना हनुमान जी की शक्ति, बल और निर्मल जीवन से की गई है। उनके भक्तों के प्रति प्रेम और उनकी पीड़ा को समझने की भावना को भी गीत में विशेष स्थान दिया गया है। “अपने भक्तों का पढ़ लेता, वो आने वाला कल” जैसी पंक्ति बाबा की चमत्कारी और आध्यात्मिक छवि को भक्तों की आस्था के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यह भजन बाबा को केवल एक संत के रूप में नहीं, बल्कि राम और हनुमान भक्ति की प्रेरणा देने वाले आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में चित्रित करता है।
भजन में कैंची धाम और वृन्दावन का विशेष उल्लेख भी मिलता है। कैंची धाम को बाबा की तपस्या से जोड़ा गया है और वृन्दावन में उनके समाधि लेने की बात कही गई है। अंतिम पंक्तियों में ब्रज और कान्हा की गोद का भाव लाकर बाबा के जीवन को कृष्णभूमि से भी जोड़ा गया है। हालांकि गीत में उनके जन्म और देह त्याग से संबंधित कुछ बातें भक्तिपरक काव्यात्मक वर्णन के रूप में कही गई हैं, इसलिए इन्हें ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले अलग से प्रमाणित करना उचित होगा।
Harshit Ji ,
ReplyDeleteRadhe - Radhe ,
Hanuman Ansh Ke is Bhajan Ka Part-2 Bhi Jaldi Hi Aa Raha Hai