मुरली बजा के मोहना
मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा।
अपनों से हाय कैसा व्यवहार है तुम्हारा॥
ढूंढा गली गली में, खोजा डगर डगर में।
मन में यही लगन है, दर्शन मिले दुबारा॥
मुरली बजा के मोहना...
मधुबन तुम्ही बताओ, मोहन कहाँ गया है।
कैसे झुलस गया है, कोमल बदन तुम्हारा॥
मुरली बजा के मोहना...
यमुना तुम्हीं बताओ, छलिया कहाँ गया है।
तूँ भी छलि गयी है, कहती है नील धारा॥
मुरली बजा के मोहना...
दुनियां कहे दीवानी, मुझे पागल कहे जमाना।
पर तुमको भूल जाना, हमको नहीं गवांरा॥
मुरली बजा के मोहना...
श्रेणी : कृष्ण भजन
Murli Bajake Mohna Kali Kamli Wale Maine by Vinod Agarwal [Krishna Bhajan] I Shyam Ghan Kab Barsoge
यह भजन "मुरली बजा के मोहना" एक अत्यंत भावुक और भक्तिभाव से परिपूर्ण कृष्ण भजन है, जो श्रीकृष्ण के विरह में डूबी हुई आत्मा की पुकार को व्यक्त करता है। इस भजन में एक भक्त की व्यथा झलकती है, जो अपने प्रिय मोहन—कृष्ण—से बिछड़ जाने के दुःख में व्याकुल होकर उन्हें पुकारता है। “मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा” यह पंक्ति उस गहरे दर्द को प्रकट करती है जब स्वयं भगवान अपने ही भक्तों से किनारा कर लेते हैं। हर श्लोक में कृष्ण के प्रति भक्ति और विरह का अद्भुत मिश्रण है, जो सुनने वालों की आत्मा को छू जाता है। गायक विनोद अग्रवाल जी की मधुर आवाज़ में यह भजन और भी अधिक भावपूर्ण हो जाता है, जिससे यह भजन न केवल कानों को, बल्कि ह्रदय को भी भिगो देता है। गली-गली में, डगर-डगर में कृष्ण को खोजने का चित्रण, मधुबन और यमुना से प्रश्न करना, यह सब एक भक्त की तीव्र तड़प और भक्ति को दर्शाता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संवाद है, जो हर कृष्ण भक्त के मन को छू जाता है।