है आपके हाथों में मेरी बिगड़ी बना देना
भोले मेरी नैया को भव पार लगा देना,
है आपके हाथों में मेरी बिगड़ी बना देना,
भोले मेरी नैया को भव पार लगा देना.....
तुम शंख बजाकर के दुनिया को जगाते हो,
डमरु की मधुर धुन से सत मार्ग दिखाते हो,
मैं मूरख सब मेरे अवगुण को भुला देना,
भोले मेरी नैया को....
चहूं ओर अंधेरा है तूफान ने घेरा है,
कोई राह नहीं दिखती एक तुम पर भरोसा है,
एक आस लगी तुमसे मेरी लाज बचा लेना,
भोले मेरी नैया को...
ए जगदंबा के स्वामी देवा दी देव नमामि,
सबके मन की तुम जानो शिव शंकर अंतर्यामी,
दुख आप मेरे मन का महादेव मिटा देना,
भोले मेरी नैया को....
महादेव जटा में तुमने गंगा को छुपाया है,
माथे पर चंद्र सजाया विषधर लिपटाया है,
मुझे नाथ गले अपने महाकाल लगा लेना,
भोले मेरी नैया को भव पार लगा देना.....
श्रेणी : शिव भजन
भोले मेरी नैया को भव पार लगा देना एक अत्यंत भावुक और हृदयस्पर्शी शिव भजन है, जिसमें एक भक्त का अपने आराध्य भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण और आस्था की गूंज सुनाई देती है। यह भजन जीवन के संघर्षों, अज्ञान के अंधकार, और अवरोधों से जूझते हुए एक भक्त की विनम्र प्रार्थना को दर्शाता है, जो महादेव से यह निवेदन करता है कि वे उसकी बिगड़ी हुई नैया को भवसागर से पार लगा दें।
भजन की प्रत्येक पंक्ति शिव की महिमा का बखान करते हुए, उन्हें करुणामूर्ति, अंतर्यामी, और संकटमोचन के रूप में चित्रित करती है। कहीं वह डमरु की धुन से संसार को दिशा दिखाने वाले बनते हैं, तो कहीं गंगा और चंद्र को अपने शीश पर धारण करने वाले विराट रूप में सामने आते हैं। भक्त अपनी भूलों, अज्ञानता और कष्टों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर, उनसे उद्धार की प्रार्थना करता है।
इस भजन में भक्त का भाव अत्यंत सरल, सच्चा और आत्मिक है, जो सीधे मन को छूता है। "ए जगदंबा के स्वामी" जैसी पंक्तियाँ महादेव की उस सर्वव्यापकता को दर्शाती हैं, जो भक्तों की पीड़ा को बिना कहे ही समझ जाते हैं। भजन में भक्त यह भी कहता है कि कोई राह नहीं दिखती, परंतु उसे एकमात्र भरोसा शिवशंकर पर है।