श्री गणेशाष्टकं
(अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु
श्रीनिम्बार्काचार्यपीठाधीश्वर
श्रीराधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य "श्री श्रीजी महाराज" द्वारा विरचित)
गणेशं सदा विघ्नबाधा कदम्ब-
प्रणाशे पटुं नित्यशान्तं गभीरम् ।
प्रसन्नम् सुपीनं हरेर्ध्यानमग्नं
महामोदकारं सुदेवं नमामि ।।
विशालं शुभं वक्रतुण्डं मनोज्ञम्
प्रवीणञ्च विज्ञानविद्याकलासु ।
असीमप्रभावं गुणज्ञानकोषं
प्रपूज्यं सदासर्वदेवेषु वन्दे ।।
दयासागर दिव्यधी--दानकक्षम्
सदा साधकेभ्यो मुदा मुक्तहस्तम् ।
शुभारम्भवन्द्यम् प्रियं कान्तिमन्तम्
गणेशं वरेशं सुरेशं नमामि ।।
दधानं करे मोदकं गौरवर्णम्
मणीनां महामालया शोभमानम् ।
उपस्यां जनै-र्भावुकै-र्भव्यरूपं
धिया सेव्यमानं गणेशं नमामि ।।
गणाधीश्वरं सद्गुणाढयं गणेशं
वरिष्ठं महाविघ्नहर्तारमीड्यं ।
विचित्राम्बरं भालचंन्द्रम् गजस्यां
सदा चेतसा चिन्तनीयञ्च वन्दे ।।
सुलम्बोदरं मूसकस्तं मतीशं
प्रसिद्धम् सतामृद्धिसिद्धिप्रसेव्यम् ।
नरिनृत्यमानं हरे: कीर्तने च
प्रसन्नाsननं श्रीगणेशं प्रणौमि ।।
सुदूर्वाड्कुरै रक्तपुष्पै: प्रसन्नम्
श्रुतीनां सुमन्त्रै: सदा सेव्यमानम् ।
समाराध्यमाप्तै र्गुणागाररूपं
गणेशं नुतं भूतयूथै र्नमामि ।।
अहो सुन्दरं शास्त्रसिद्धम् स्वरूपं
महादेवदेवं शरण्यं वरेण्यम् ।
अचिन्त्यम् सुधिवृन्दसेव्यं सुधापं
सदानन्दपूर्णम् गणेशं प्रणौमि ।।
श्रीगणेशाष्टकम् स्तोत्रमृद्धिसिद्धिप्रदायकम् ।
राधासर्वेश्वराद्येन शरणान्तेन निर्मितम् ।।
श्रेणी : गणेश भजन
Bhajan
श्री गणेशाष्टकं एक अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य स्तोत्र है, जिसकी रचना अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु श्रीनिम्बार्काचार्यपीठाधीश्वर श्रीराधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य "श्री श्रीजी महाराज" ने की है। यह स्तोत्र भगवान गणेश की स्तुति में लिखा गया है, जो कि विघ्नों का नाश करने वाले, शुभारंभ के देवता तथा बुद्धि, विद्या और विवेक के प्रतीक हैं। इस स्तोत्र में भगवान गणेश के सौंदर्य, उनके दिव्य स्वरूप, शांति, गाम्भीर्य, करुणा, और भक्तों पर उनकी कृपा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। उनकी गजमुखी आकृति, वक्रतुण्ड रूप, मोदकप्रियता, मुषकवाहन, और त्रैलोक्य में पूज्य स्थान को अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में वर्णित किया गया है। यह स्तोत्र न केवल भगवान गणेश की स्तुति करता है, बल्कि भक्त के हृदय में श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की भावना को भी जाग्रत करता है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करने से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन के समस्त विघ्नों का नाश होता है। श्री गणेशाष्टकं वास्तव में एक अद्भुत भक्तिपूर्ण काव्य है, जो वैदिक ज्ञान, काव्य कला और आध्यात्मिक भावनाओं का सुंदर संगम है। यह भजन न केवल एक स्तोत्र है, बल्कि साधकों के लिए आध्यात्मिक साधना का एक सशक्त माध्यम भी है।