प्रभु का सहारा
मेरे जीवन की एक वक्त के सत्य घटना को साझा करता ये गीत -
सहारे अब सभी छूटे ना कोई काम आया है,
पकड़कर प्रभु तेरा दामन तुझे अपना बनाया है।।
भरोसा दोस्तों पर था यकीनन काम आयेंगे,
मगर जब थी जरुरत तब हमें सबने भुलाया है।।
देखकर दौर मुश्किल का कलेजा कंप गया मेरा,
मदद मांगी मैने सबसे मगर कुछ ना पाया है।।
भूलकर स्वप्न सी दुनिया हकीकत में मुसीबत थी,
अचानक वक्त ने हमको मुकद्दर तक सताया है ।।
लौटकर इस जमाने से तेरे आंचल मे आया हूं,
आज ‘आर्यन’ ने ह्रदय का राज सारा बताया है ।।
श्रेणी : विष्णु भजन
"प्रभु का सहारा" एक अत्यंत भावनात्मक और हृदयस्पर्शी विष्णु भजन है, जो किसी सच्चे जीवन अनुभव से प्रेरित होकर लिखा गया प्रतीत होता है। यह भजन उस कठिन समय की कहानी कहता है जब दुनिया के सारे सहारे छूट जाते हैं और एकमात्र सहारा प्रभु ही बनते हैं।
भजन की शुरुआत इस सत्य से होती है कि जीवन में एक ऐसा समय आता है जब कोई भी साथ नहीं देता — “सहारे अब सभी छूटे, ना कोई काम आया है।” ये पंक्ति सीधे दिल को छू जाती है और उन सभी परिस्थितियों को जीवंत कर देती है जब इंसान अकेला महसूस करता है।
भजनकार ने अपने जीवन की उस सच्चाई को शब्दों में ढाला है जहाँ सबसे अधिक विश्वास जिन पर था, वही लोग समय पर साथ नहीं देते — “भरोसा दोस्तों पर था, यकीनन काम आयेंगे, मगर जब थी जरुरत, तब हमें सबने भुलाया है।”
इस गीत में यह साफ़ झलकता है कि जब पूरी दुनिया ने साथ छोड़ दिया, तब प्रभु ही एकमात्र आसरा बने। यह अनुभूति हर उस भक्त की होती है जो अपने जीवन की कठिन घड़ियों में भगवान की शरण में आता है।