आओ भोग लगाओ मेरे मोहन
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन,
आओ जी भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
दुर्योधन की मेवा त्यागी,
साग विदुर घर खाओ मेरे मोहन,
आओ आओ भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
शबरी के बेर सुदामा के तंदुल,
प्रेम से भोग लगाओ मेरे मोहन,
आओ आओ भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
वृदावन की कुञ्ज गलीन में,
आओ रास रचाओ मेरे मोहन,
आओ आओ भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
राधा और मीरा भी बोले,
मन मंदिर में आओ मेरे मोहन,
आओ आओ भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
गिरी छुआरा किशमिश मेवा,
माखन मिश्री खाओ मेरे मोहन,
आओ आओ भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
सत युग त्रेता द्वापर कलयुग,
हर युग दरस दिखाओ मेरे मोहन,
आओ आओ भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन,
आओ जी भोग लगाओं मेरे मोहन ।।
श्रेणी : कृष्ण भजन
Aao Bhog Lagao Mere Mohan
यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। इस भजन में भक्त श्री कृष्ण के सामने विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित करने की बात करते हैं, जैसे शबरी के बेर, सुदामा के तंदुल, और वृंदावन की गली में रास रचाने की भावनाएँ। यह भजन कृष्ण की महिमा और उनके साथ भक्तों के अनन्य संबंध को व्यक्त करता है।
भजन में राधा और मीरा का भी उल्लेख है, जो श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए उन्हें भोग अर्पित करने का आह्वान करती हैं। इस भजन का हर पंक्ति भक्तों के दिलों में कृष्ण भक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करती है।
यह भजन न केवल भक्ति की भावना को जागृत करता है, बल्कि भक्तों को कृष्ण के साथ अपने आत्मिक संबंध को और मजबूत करने की प्रेरणा भी देता है।