चलो भक्तो मैया के द्वार
चलो भक्तो माँ के द्वार मैया ने हमे बुलाया है,
मैया ने हमे बुलाया है दाती ने हमे बुलाया है,
चलो छोड़के सब संसार मैया ने हमे बुलाया है.....
रस्ता देख रही है मैया हमको बुला रही है मैया,
लुटाने हमपे अपना प्यार मैया ने हमे बुलाया है,
चलो भक्तो माँ के द्वार मैया ने हमे बुलाया है....
ऊँची है वो पर्वतमाला जहाँ पे माँ का भवन निराला,
लगाके बैठी माँ दरबार मैया ने हमे बुलाया है,
चलो भक्तो माँ के द्वार मैया ने हमे बुलाया है.....
कब होगा माँ का दर्शन है कुर्मी अमन का व्याकुल मन है,
केशव करता जय जयकार मैया ने हमे बुलाया है,
चलो भक्तो माँ के द्वार मैया ने हमे बुलाया है.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
माता का भजन | चलो भक्तो मैया के द्वार | Chalo Bhakto Maiya Ke Dwar | Keshav Sharma
“चलो भक्तो मैया के द्वार” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें माता के भक्तों को उनके पवित्र दरबार में जाने के लिए प्रेरित किया गया है। भजन की मुख्य पंक्ति “चलो भक्तो माँ के द्वार, मैया ने हमें बुलाया है” माता के बुलावे और भक्त की उनके दर्शन की लालसा को दर्शाती है। इसमें संसार की व्यस्तताओं को छोड़कर माता की शरण में जाने और उनके प्रेम को प्राप्त करने की भावना प्रमुख है।
भजन में भक्तों से कहा गया है कि “छोड़के सब संसार” माता के द्वार चलो, क्योंकि स्वयं मैया ने बुलाया है। यह भाव भक्त और माता के बीच के आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है, जहां माता का बुलावा केवल यात्रा का निमंत्रण नहीं बल्कि उनकी कृपा और शरण प्राप्त होने का संकेत माना जाता है। “रस्ता देख रही है मैया” और “लुटाने हमपे अपना प्यार” जैसी पंक्तियां माता के वात्सल्य और भक्तों के प्रति उनके प्रेम की सुंदर कल्पना प्रस्तुत करती हैं।
आगे भजन में माता के ऊँचे पर्वतों पर स्थित भव्य भवन और दरबार का वर्णन किया गया है। पर्वतमाला के बीच माता का भवन भक्तों के लिए श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन जाता है। “लगाके बैठी माँ दरबार” की पंक्ति माता को अपने भक्तों की प्रतीक्षा करती हुई करुणामयी जननी के रूप में प्रस्तुत करती है। यह दृश्य नवरात्रि और माता के धाम की यात्रा से जुड़े भक्तिमय वातावरण को और गहरा करता है।
भजन के अंतिम अंतरे में भक्त के मन की दर्शन की व्याकुलता सामने आती है। “कब होगा माँ का दर्शन” कहकर भक्त अपनी अधीरता व्यक्त करता है। यहां “कुर्मी अमन का व्याकुल मन” और “केशव करता जय जयकार” जैसी पंक्तियां भजन को व्यक्तिगत भक्ति-अनुभूति से जोड़ती हैं। भक्त माता के दर्शन के लिए प्रतीक्षा करता है और उनकी जय-जयकार करते हुए अपनी श्रद्धा प्रकट करता है।