एक फकीरा माँ के दर पे
एक फकीरा माँ के दर पे,
एक फकीरा माँ के दर पे,
हो एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा....
एक फकीरा माँ के दर पे,
हो एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा....
ब्रम्हा विष्णु शिव शंकर जी माँ की महिमा गाते,
ब्रम्हा विष्णु शिव शंकर जी माँ की महिमा गाते,
ऋषि मुनि ज्ञानी और ध्यानी माँ को शीश नवाते,
ऋषि मुनि ज्ञानी और ध्यानी माँ को शीश नवाते,
माता ज्वाला की ज्योति का भक्तो अजब नजारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ....
बड़े बड़े दानी महादानी माँ को रोज है ध्याते,
बड़े बड़े दानी महादानी माँ को रोज है ध्याते,
मन की इच्छा पूरी करते मन चाहा फल पाते,
मन की इच्छा पूरी करते मन चाहा फल पाते,
एक नहीं जहाँ लाखो करोडो झुकता है जग सारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा....
किरपा करती मात भवानी जो दर माँ के जाए,
किरपा करती मात भवानी जो दर माँ के जाए,
जाने कितने दीवाने तर गए माँ दर शीश झुकाये,
जाने कितने दीवाने तर गए माँ दर शीश झुकाये,
भव सागर से अब मैया सबको पार उतारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा.....
एक फकीरा माँ के दर पे,
हो एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,
जय जय जय माँ जय जय जय माँ,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा,
माँ के दर पर आकर झुकता भकतो आलम सारा.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
एक फकीरा माँ के दर पे | Ek Fakira Maa ke Dar Pe | Kumar Vishu | Mata Rani Bhajan
इस भजन में माँ के दरबार की महिमा का वर्णन किया गया है, जहाँ राजा हो या फकीर, हर भक्त श्रद्धा से अपना सिर झुकाता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि माँ भवानी के सामने सभी समान हैं और हर कोई अपनी मनोकामना, विश्वास तथा भक्ति लेकर उनके दरबार में आता है। माँ ज्वाला की पवित्र ज्योति और ब्रह्मा, विष्णु, शिव सहित ऋषि-मुनियों द्वारा उनकी महिमा गाने का उल्लेख माँ की दिव्य शक्ति के प्रति श्रद्धा को प्रकट करता है।
भजन हमें माँ के प्रति समर्पण, विनम्रता और अटूट विश्वास का संदेश देता है। माँ के चरणों में शीश झुकाना अहंकार त्यागकर सच्चे मन से प्रार्थना करने का प्रतीक है। भवसागर से पार उतारने की प्रार्थना जीवन की कठिनाइयों से उबरने और आध्यात्मिक शांति पाने की आशा को दर्शाती है। यह भजन भक्तों के मन में उत्साह, विश्वास और माँ के जयकारे लगाने की भावना जगाता है। 🙏 जय माँ भवानी!