मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर
आ गई है मैया गली गली में शोर,
मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर....
इधर घूमाए चाहे उधर घूमाए,
जिस ओर चाहे मैया मुझको नचाए,
नाच रही मैं ऐसे जैसे बन में नाचे मोर,
मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर....
जिससे भी चाहे मैया पैच लड़ाए,
पास बुलाए चाहे दूर भगाएं,
कटु या वापस आऊ मेरा चले ना कोई जोर,
मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर...
रंग बिरंगी मां ने मुझको बनाया,
सुख और दुख का है मेल कराया,
मां के हाथ में डोरी वह ले ले जिसकी ओर,
मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर....
दूर गगन में मैं तो उड़ती ही जाऊं,
डर लगता है कहीं कट नहीं जाऊं,
रास्ता नहीं सूझे चहू नीला घनघोर,
मैं बनी पतंग मेरी मैया बन गई डोर.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
ME BANI PATANG MERI MAIYA BAN GAYI DOR
"मैं बनी पतंग, मेरी मैया बन गई डोर" एक सुंदर भजन है, जो माता दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है। इस भजन के बोल दर्शाते हैं कि कैसे जीवन में माता की डोरी से जुड़े रहने पर हम हर दिशा में अपनी यात्रा पूरी कर सकते हैं। भजन में यह संदेश भी है कि जैसे पतंग हवा में उड़ती है, वैसे ही हम भी मां की कृपा से हर मुश्किल को पार कर सकते हैं। माता के आशीर्वाद से हम हमेशा सशक्त रहते हैं, चाहे जीवन में कोई भी स्थिति हो।
इस भजन में भगवान के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति का भाव व्यक्त किया गया है। माता की डोरी के माध्यम से, हमें अपने जीवन को सही दिशा में चलाने की प्रेरणा मिलती है। इसे सुनते हुए हमें अपने जीवन की सच्ची राह का एहसास होता है।