बसा लो वृन्दावन में
मन बस गयो नन्द किशोर,
अब जाना नहीं कही और,
बसा लो वृन्दावन में....
सौप दिया अब जीवन तोहे,
रखो जिस विधि रखना मोहे,
तेरे दर पे पड़ी हूँ सब छोड़,
अब जाना नहीं कही और,
बसा लो वृन्दावन में......
चाकर बन कर सेवा करुँगी,
मधुकरि मांग कलेवा करुँगी,
तेरे दरश करुँगी उठ भोर,
अब जाना नहीं कही और,
बसा लो वृन्दावन में..........
अरज़ मेरी मंजूर ये करना,
वृन्दावन से दूर न करना,
कहे मधुप हरी जी हां जोड़,
अब जाना नहीं कही और,
बसा लो वृन्दावन में.....
प्यारे बसा लो वृन्दावन में.....
ओ मन बस गयो नन्द किशोर,
अब जाना नहीं कही और,
बसा लो वृन्दावन में....
श्रेणी : कृष्ण भजन
Shri Radha
यह भजन "मन बस गयो नन्द किशोर" भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त अपनी प्रार्थना के माध्यम से श्री कृष्ण से विनती करते हैं कि वे उन्हें वृन्दावन में बसा लें और उनका जीवन पूरी तरह से श्री कृष्ण की सेवा में समर्पित हो जाए। भक्त यह प्रकट करते हैं कि वे अब किसी और स्थान पर नहीं जाना चाहते, क्योंकि उनका मन तो बस श्री कृष्ण के चरणों में लग गया है।
यह भजन न केवल भक्तों को श्री कृष्ण के चरणों में ध्यान केंद्रित करने का संदेश देता है, बल्कि यह उनकी भक्तिपूर्ण भावना और आस्था को भी प्रगट करता है। भजन में उपयोग की गई भावनाओं और शब्दों से प्रेम और समर्पण की गहरी अनुभूति होती है, जो किसी भी भक्त को प्रेरित कर सकती है।
"बसा लो वृन्दावन में" इस भजन का मुख्य संदेश है, जो भक्तों को एक सकारात्मक और आध्यात्मिक दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।