मैया कितनी है दूरी
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को टीका पसंद है,
बिंदिया लगानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को झुमके पसंद है,
नथनी पहनानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
तेरी मैया को हरवा पसंद है,
माला पहनानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को चूड़ियां पसंद है,
मेहंदी लगानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को तगड़ी पसंद है,
गुच्छा लगाना है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को पायल पसंद है,
महावर लगानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को लहंगा पसंद है,
चुदरी उढानी है जरूरी बताओ मैया कितनी है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
मेरी मैया को हलवा पसंद है,
छोले खिलाने है जरूरी बताओ मैया कितना है दूरी,
कितनी है दूरी मैया कितनी है दूरी,
पैरों में पड़ गए छाले बताओ मैया कितनी है दूरी,
रास्ता चला नहीं जाए बताओ मैया कितनी है दूरी......
श्रेणी : दुर्गा भजन
श्रद्धा से भरे भक्तों के कदमों में छाले पड़ गए हैं, पर फिर भी माँ तक पहुँचने की ललक खत्म नहीं होती। माँ को सजाने के लिए टीका, बिंदिया, झुमके, नथनी, माला, चूड़ियां, और पायल सब कुछ चाहिए। भक्त हर जरूरी चीज लाना चाहते हैं, चाहे राह कितनी भी लंबी क्यों न हो। रास्ता भले ही कठिन हो, पर माँ की आराधना में यह सफर छोटा लगता है। हलवा, छोले का प्रसाद और माँ के लिए लहंगा-चुंदरी लाने का उत्साह भक्तों के कदम थमने नहीं देता। आखिर, हर श्रद्धालु के मन में बस यही सवाल है – "मैया, कितनी है दूरी?" माँ की कृपा से यह दूरी एक न एक दिन जरूर मिटती है, और तब भक्त का समर्पण, उसका सच्चा प्रेम माँ तक पहुँच ही जाता है।