मईया तेरे नाम के दीवाने हो गए
( माँ तेरे दरबार में, रौनक लगी देखी है* ll
माँ तुझको, देते हुए नहीं देखा,
मगर झोली सब की, भरी देखी है ll )
मस्ती में रंग, मस्ताने हो गए* ll
मईया तेरे, नाम के दीवाने हो गए ll-ll
^तेरे बिना, दिल मेरा लगता नहीं,
मन का चिराग, कहीं जगता नहीं ll
सारी दुनियाँ से, हम बेगाने हो गए* ll
मईया तेरे, जय हो जय हो lll,
नाम के दीवाने हो गए ll
मस्ती में रंग, मस्ताने..............
^तेरे बिना, कुछ मुझे भाता नहीं,
मन को सकून, मेरे आता नहीं ll
लवों पे तेरे ही, तराने हो गए* ll
मईया तेरे, जय हो जय हो lll,
नाम के दीवाने हो गए ll
मस्ती में रंग, मस्ताने..............
^मईया तेरा रूप, सुहाना है,
दीवाना हुआ, यह ज़माना है ll
जन्मों की प्यास, बुझाने जो गए* ll
मईया तेरे, जय हो जय हो lll,
नाम के दीवाने हो गए ll
मस्ती में रंग, मस्ताने..............
^मईया तुझे, कभी न भुलाएं हम,
अख्खियों में, तुझे ही बसाएँ हम ll
मन को रंग में, रंगाने जो गए* ll
मईया तेरे, जय हो जय हो lll,
नाम के दीवाने हो गए ll
मस्ती में रंग, मस्ताने..............
^हम भी तो तेरे ही, बच्चे हैं मईया,
अक्लों के थोड़े थोड़े, कच्चे हैं मईया ll
तेरे चरणों में ही, ठिकाने हो गए* ll
मईया तेरे, जय हो जय हो lll,
नाम के दीवाने हो गए ll
मस्ती में रंग, मस्ताने..............
श्रेणी : दुर्गा भजन
Maiya Tere Naam Ke Deewane Ho Gaye Bhajan Lyrics Vijay ji Vaishno Devi Bhajan
“मईया तेरे नाम के दीवाने हो गए” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें मां दुर्गा के प्रति भक्तों की गहरी श्रद्धा, प्रेम और भक्ति में डूब जाने की भावना व्यक्त की गई है। भजन की मुख्य पंक्ति “मईया तेरे नाम के दीवाने हो गए” बताती है कि जब भक्त मां के प्रेम और उनकी महिमा से जुड़ता है, तो उसका मन संसार की दूसरी बातों से हटकर माता की भक्ति में रमने लगता है। इसमें मां के दरबार की रौनक, उनकी कृपा और उनके नाम के स्मरण से मिलने वाले आध्यात्मिक आनंद का सुंदर वर्णन मिलता है।
भजन की शुरुआत मां के दरबार की महिमा से होती है। “माँ तुझको देते हुए नहीं देखा, मगर झोली सबकी भरी देखी है” पंक्ति भक्तों के उस विश्वास को दर्शाती है कि माता अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और उनकी प्रार्थनाओं को सुनती हैं। यहां झोली भरने का अर्थ केवल धन या वस्तुएं प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में सुख, शांति, आशा और मनोबल मिलना भी है। मां का दरबार भक्तों के लिए विश्वास और सहारे का स्थान बन जाता है।
अगले अंतरे में भक्त अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहता है कि मां के बिना उसका मन कहीं नहीं लगता और हृदय का दीपक भी मानो नहीं जलता। “सारी दुनिया से हम बेगाने हो गए” पंक्ति का भाव यह है कि माता की भक्ति में डूबकर भक्त का मन सांसारिक आकर्षणों से दूर होने लगता है। उसके लिए मां का नाम ही सबसे प्रिय बन जाता है। यह भक्ति की उस अवस्था को दर्शाता है, जिसमें मनुष्य अपने आराध्य के स्मरण से भावनात्मक शांति और आत्मीयता अनुभव करता है।
भजन में आगे बताया गया है कि मां के बिना किसी चीज में मन नहीं लगता और हृदय को सुकून नहीं मिलता। भक्त के होंठों पर हर समय माता के गुणगान और जयकारे रहते हैं। “मईया तेरा रूप सुहाना है, दीवाना हुआ यह जमाना है” जैसी पंक्तियां मां के दिव्य स्वरूप और उनकी महिमा के प्रति भक्तों के आकर्षण को प्रकट करती हैं। जन्मों की प्यास बुझाने का भाव आध्यात्मिक तृप्ति और माता के दर्शन की गहरी लालसा को दर्शाता है।
इसके बाद भक्त मां से प्रार्थना करता है कि वह उन्हें कभी न भूले और माता की छवि सदैव उसकी आंखों तथा मन में बसी रहे। “मन को रंग में रंगाने” का भाव अपने विचारों, भावनाओं और जीवन को माता की भक्ति से जोड़ने का प्रतीक है। जिस प्रकार किसी रंग में रंगने पर वस्तु का रूप बदल जाता है, उसी प्रकार मां की भक्ति में रंगा हुआ मन प्रेम, श्रद्धा और विश्वास से भरने लगता है। भजन इस बात पर जोर देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा के समय तक सीमित न रहकर जीवन का हिस्सा बन जाए।