ओ माँ मेरी शेरावाली
( दरबार तेरा दाती दरबारों में एक खास अहमियत रखता है,
उसको वैसा मिल जाता है जो जैसी नियत रखता है। )
जय माता दी,
जय हो..
मां मेरी शेरावाली मैया ज्योतावाली ओ मां मेरी,
जय हो..
मां मेरी शेरावाली मैया ज्योतावाली,
भक्तों को दुखियों को मां तेरा सहारा,
तेरा मंदिर है न्यारा,
जय हो,
तुझे पूजे जग सारा,
जय हो,
तेरा गूंजे जय कारा,
जय हो,
ओ मां मेरी मां मेरी...
त्रिकूट पर्वत तेरा डेरा,
त्रिकूट पर्वत तेरा डेरा,
शेर सवारी मैया रंग सुनहरा,
शेर सवारी मैया रंग सुनहरा,
सब की है तू मेरा कोई नहीं शेरावाली,
सबकी है तू सबकी है तू मेरा कोई नहीं पहाड़ा वाली,
भक्तों को दुखियों को मां है तेरा सहारा,
तेरा मंदिर है न्यारा,
जय हो,
तुझे पूजे जग सारा,
जय हो,
तेरा गूंजे जय कारा,
जय हो,
ओ मां मेरी मां मेरी...
मैया सबके काज संवारे,
मैया सबके काज संवारे,
आन खड़ा मैं भी तेरे द्वारे,
आन खड़ा मैं भी तेरे द्वारे,
सबकी है तू मेरा कोई नहीं मेहरा वाली सबकी है तू,
सबकी है तू मेरा कोई नहीं मेहरा वाली,
भक्तों को दुखियों को मां है तेरा सहारा,
तेरा मंदिर है न्यारा,
जय हो,
तुझे पूजे जग सारा,
जय हो,
तेरा होता जय कारा,
जय हो,
ओ मां मेरी मां मेरी....
तोड़ लिया मैंने जग से नाता,
तोड़ लिया मैंने जग से नाता,
तेरे सिवा कोई नजर ना आता,
तेरे सिवा कोई नजर ना आता,
सबकी है तू मेरा कोई नहीं ज्योतावाली सबकी है तू,
सबकी है तू मेरा कोई नहीं ज्योतावाली,
दुखियों को भक्तों को मां तेरा सहारा,
तेरा मंदिर है न्यारा,
जय हो,
तुझे पूजे जग सारा,
जय हो,
तेरा होता जय कारा,
जय हो,
मां मेरी शेरावाली मैया ज्योतावाली,
भक्तों को दुखियों को मां तेरा सहारा,
तेरा मंदिर है न्यारा,
जय हो,
तुझे पूजे जग सारा,
जय हो,
तेरा गूंजे जय कारा,
जय हो,
ओ मैया शेरावाली,
जय हो,
भरती झोली खाली,
जय हो,
मैया शेरावाली,
जय हो,
ओ भरती झोली खाली,
जय हो,
ओ मैया शेरावाली,
जय हो,
ओ भरती झोली खाली,
ओ मैया शेरावाली ओ भरती झोली खाली...
जयकारा शेरावाली दा जय कारा मेहरा वाली दा....
श्रेणी : दुर्गा भजन
नवरात्रि Special भजन | O Maa Meri Sherawali | Sanjay Gulati | Navaratri 2020 | Mata Ke bhajan
“ओ माँ मेरी शेरावाली” एक श्रद्धापूर्ण दुर्गा भजन है, जिसमें मां शेरावाली को भक्तों और दुखियों का सबसे बड़ा सहारा बताया गया है। भजन की शुरुआत में ही यह भाव सामने आता है कि माता के दरबार में भक्त को उसकी श्रद्धा और नीयत के अनुसार कृपा प्राप्त होती है। “जय माता दी” के जयकारे के साथ माता शेरावाली और ज्योतावाली के प्रति भक्त अपनी आस्था प्रकट करता है और उनके मंदिर को विशेष एवं पवित्र स्थान के रूप में देखता है।
इस भजन में माता के त्रिकूट पर्वत पर विराजमान स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। “त्रिकूट पर्वत तेरा डेरा” और “शेर सवारी मैया” जैसी पंक्तियां माता के उस पारंपरिक स्वरूप को सामने लाती हैं जिसमें वे शेर पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देती हैं। भक्त माता को सबकी मां मानता है और स्वयं को ऐसा व्यक्ति महसूस करता है जिसका माता के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा नहीं है। इस भाव में माता के प्रति पूर्ण विश्वास और शरणागति दिखाई देती है।
भजन का एक प्रमुख भाव माता के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचना है। “मैया सबके काज संवारे, आन खड़ा मैं भी तेरे द्वारे” में भक्त स्वीकार करता है कि वह भी अपनी आशा और विश्वास लेकर माता के द्वार पर आया है। वह माता से अपने जीवन के कार्यों को संवारने और अपनी खाली झोली भरने की प्रार्थना करता है। यहां “झोली” भक्त की इच्छाओं, उम्मीदों और मनोकामनाओं का प्रतीक है।
आगे भक्त कहता है कि उसने दुनिया से अपना नाता छोड़कर माता को ही अपना सहारा मान लिया है। “तेरे सिवा कोई नजर ना आता” जैसी पंक्तियां माता के प्रति एकनिष्ठ भक्ति को दर्शाती हैं। भक्त की दृष्टि में माता ही सबकी हैं, लेकिन उसके लिए माता के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है। यह भाव भक्ति में पूर्ण समर्पण और विश्वास को प्रकट करता है, जहां भक्त अपने सुख-दुख की जिम्मेदारी माता के चरणों में सौंप देता है।
भजन में मंदिर, जयकारा और सामूहिक भक्ति का वातावरण भी बार-बार दिखाई देता है। “तुझे पूजे जग सारा” और “तेरा गूंजे जयकारा” जैसी पंक्तियां माता की आराधना में शामिल भक्तों के सामूहिक उत्साह को दर्शाती हैं। अंत में “जयकारा शेरावाली दा, जयकारा मेहरा वाली दा” जैसे उद्घोष भजन को जागरण और नवरात्रि के भक्तिमय वातावरण से जोड़ देते हैं। माता को “भरती झोली खाली” कहकर उनके कृपामयी और दानी स्वरूप को भी याद किया गया है।