बंसी तेरी श्यामा वे मीठे बोल बोलदी
बंसी तेरी श्यामा वे मीठे बोल बोलदी,
जीनू सुनके निमानी जिंद मेरी डोल दी....
सारे लोकी पुकार दे ने श्याम श्याम श्याम,
असा पापिया ने जपया ना तेरा नाम नाम,
ताइयां आया न श्यामा तू साढ़े कोल वे,
बंसी तेरी श्यामा वे मीठे बोल बोलदी.....
मेनु सारे जहान बिच तेरी लोड वे,
जीनू तेरा सहारा ऊनु कैदी थोड़ वे,
तेनु छड़के कसामत करा किथे और वे,
बंसी तेरी श्यामा वे मीठे बोल बोलदी....
मेनु सारे जहान बिच तेरी लोड वे,
जिनू तेरा सहारा ऊनु कैदी लोड वे,
नाले रोमा ते अखियां दे हंजू डोल दी,
बंसी तेरी श्यामा वे मीठे बोल बोलदी....
श्रेणी : कृष्ण भजन
Radha Ki pukaar Bansi Teri Shyama Vei || राधा की पुकार || Krishna Bhajan || Marina
यह भजन भगवान श्री कृष्ण (श्यामा/श्याम) की मधुर बंसी और उनके प्रति गहरे प्रेम-विरह की भावना को व्यक्त करता है। “बंसी तेरी श्यामा वे मीठे बोल बोलदी” एक भावनात्मक कृष्ण भजन है, जिसे Marina द्वारा गाया गया है (जैसा कि “Radha Ki Pukaar” शीर्षक से प्रसिद्ध है)। इसके मूल रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे भी पारंपरिक/लोक-भक्ति शैली की रचना माना जाता है, जिसमें पंजाबी और ब्रज भाषा का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है।
इस भजन का मुख्य भाव “विरह और प्रेम-भक्ति” है। इसमें एक भक्त (या राधा का भाव) व्यक्त किया गया है, जो कहता है कि श्याम की बंसी इतनी मधुर है कि उसे सुनकर आत्मा (जिंद) व्याकुल हो जाती है। “असा पापिया ने जपया ना तेरा नाम” पंक्ति आत्मग्लानि (repentance) का भाव दिखाती है—भक्त स्वीकार करता है कि उसने भगवान का नाम नहीं जपा, इसलिए वह उनसे दूर रह गया।
भजन में यह भी बताया गया है कि इस पूरे संसार में केवल भगवान का सहारा ही सच्चा सहारा है—“जिनू तेरा सहारा ऊनु कैदी थोड़ वे” यानी जिसे भगवान का साथ मिल जाए, उसे किसी चीज़ की कमी नहीं रहती। अंत में आँसुओं और पुकार के माध्यम से विरह की पीड़ा व्यक्त होती है, जहाँ भक्त श्याम के बिना अधूरा महसूस करता है।
कुल मिलाकर, यह भजन प्रेम, तड़प, पश्चाताप और पूर्ण समर्पण का संगम है, जिसमें भगवान कृष्ण की बंसी को दिव्य आकर्षण और आत्मा को उनकी ओर खींचने वाली शक्ति के रूप में दर्शाया गया है।