दया करो माँ दया करो
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
देर भई बड़ी देर भई,
यूँ न देर लगाया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो....
मुद्दत हो गयी हाथ पसारे अभी सुनी फरियाद नहीं,
अभी सुनी फरियाद नहीं,
माँ जग जननी इन् बच्चों का आयी तुम्हे क्यों याद नहीं,
आयी तुम्हे क्यों याद नहीं,
हम हैं बड़े कमज़ोर,
हम हैं बड़े कमज़ोर हमारा सब्र न यूँ आज़माया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो....
धुनि रमाई अलख जगाई बिगड़ी बना दो बात माँ,
बिगड़ी बना दो बात माँ,
अष्टभुजी माँ बच्चों के सिर कोई तो रख दो हाथ माँ,
कोई तो रख दो हाथ माँ,
जीतें हैं जो तेरे सहारे,
जीतें हैं जो तेरे सहारे उनको न तड़पाया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो....
सच्चे मन से चिंता हरनी हम तो पुकारे जाएंगे,
हम तो पुकारे जाएंगे,
तू ही सुनेगी तुझे कहेंगे झोली यहीं फैलाएंगे,
झोली यहीं फैलाएंगे,
छोड़ेंगे न चरण तुम्हारे,
छोड़ेंगे न चरण तुम्हारे चाहे हमें ठुकराया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
देर भई बड़ी देर भई,
यूँ न देर लगाया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो,
दया करो माँ दया करो,
अब तो मुझ पर दया करो.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Daya Karo Maa Daya Karo | Chaitra Navratri 2022 | Milan Singh | Mata Bhajan | Durga Mata Song
यह “दया करो माँ दया करो” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन / माता रानी का भजन है, जिसमें भक्त माँ जगजननी से अपने ऊपर कृपा और दया करने की विनती करता है। भजन की शुरुआत “दया करो माँ दया करो, अब तो मुझ पर दया करो” जैसी मार्मिक पुकार से होती है। इसमें भक्त अपने जीवन के दुखों, परेशानियों और लंबे समय से चली आ रही प्रतीक्षा को माँ के सामने रखता है और उनसे अपनी फरियाद सुनने की प्रार्थना करता है। भजन में माँ को जग जननी और अष्टभुजी माता के रूप में संबोधित किया गया है, जो अपने भक्तों के दुख दूर करने और उनकी बिगड़ी बनाने वाली शक्ति रखती हैं।
इस भजन का मुख्य भाव करुणा, शरणागति, विश्वास और माँ की कृपा की प्रार्थना है। भक्त कहता है कि वह लंबे समय से हाथ फैलाकर माँ से अपनी फरियाद सुना रहा है, लेकिन अभी तक उसकी पुकार नहीं सुनी गई। वह स्वयं को कमजोर और असहाय मानते हुए माँ से विनती करता है कि उसकी परीक्षा और अधिक न लें। इन पंक्तियों में एक सच्चे भक्त की वह मनोदशा दिखाई देती है, जब वह अपने सभी सहारे छोड़कर केवल माता रानी के चरणों में विश्वास रखता है।
भजन के अगले हिस्से में भक्त माँ से अपनी बिगड़ी हुई परिस्थितियों को सुधारने और अपने बच्चों के सिर पर कृपा का हाथ रखने की प्रार्थना करता है। “धुनि रमाई अलख जगाई, बिगड़ी बना दो बात माँ” जैसे भावों के माध्यम से भक्त यह विश्वास व्यक्त करता है कि माता की कृपा से कठिन से कठिन परिस्थिति भी सुधर सकती है। जो लोग माँ के सहारे अपना जीवन जी रहे हैं, उनके दुखों को दूर करने और उन्हें अधिक कष्ट न देने की विनती भी इसमें की गई है। यह भाव माता को एक ऐसी करुणामयी माँ के रूप में प्रस्तुत करता है, जो अपने सभी भक्तों की पीड़ा समझती हैं।
भजन की सबसे सुंदर भावना अटूट श्रद्धा और समर्पण में दिखाई देती है। भक्त कहता है कि वह सच्चे मन से माँ को पुकारता रहेगा और अपनी झोली फैलाकर उन्हीं से अपनी मनोकामना मांगेगा। वह यह भी कहता है कि चाहे माँ उसे ठुकराएँ या उसकी परीक्षा लें, फिर भी वह उनके चरणों को नहीं छोड़ेगा। यह पंक्तियाँ भक्त और माता के बीच के उस गहरे विश्वास को दर्शाती हैं, जिसमें भक्त को पूरा भरोसा होता है कि अंततः माँ उसकी पुकार अवश्य सुनेंगी और उस पर अपनी कृपा करेंगी।
कुल मिलाकर, “दया करो माँ दया करो” एक ऐसा भावुक माता भजन है, जिसमें भक्त अपने जीवन की परेशानियों और दुखों के बीच माँ दुर्गा से करुणा और आशीर्वाद की याचना करता है। इस भजन में माँ की शरण में जाने, धैर्य रखने, सच्चे मन से प्रार्थना करने और कठिन समय में भी विश्वास न छोड़ने का संदेश मिलता है। इसकी भावपूर्ण पंक्तियाँ विशेष रूप से उन भक्तों के मन को छूती हैं, जो अपने जीवन की किसी परेशानी या संकट के समय माता रानी से सहायता और कृपा की प्रार्थना करते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे Milan Singh की प्रस्तुति के रूप में जाना जाता है, लेकिन दिए गए पाठ से मूल गीतकार या रचनाकार का नाम निश्चित रूप से स्पष्ट नहीं होता।