जय अम्बे तेरी जय हो
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो,
दुखियो का दुःख हरने वाली, सबका मंगल करने वाली,
जय जय महा शक्ति महा देवी तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो....
तू शेरावाली माँ ज्योतावाली माँ ममता वाली माँ देवी काली,
तू है शेरावाली माता तू है ज्योतावाली माता,
तू है भवना वाली माता तू है मेहरा वाली माता,
पहाड़ावाली माँ तू है निराली माता,
कल्याणी माता तू है वरदानी,
तू है भवना वाली माता तू है मेहरा वाली माता,
जगजननी जग दुर्गा काली जय जय माता खप्पर वाली,
जय जय महा शक्ति महा देवी तेरी जय हो,
जय जय महा शक्ति महा देवी तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो....
कल्याणी माता भवतारिणी माता,
वरदानी माता, पतित पावनी माता,
तू कल्याणी माता मेरी, जय भवतारिणी माता,
तू भवना वाली माता, तू है वैष्णो माँ,
तू पालन करती, दुःख सबके हरती,
वैष्णो देवी माँ तू है निराली,
भक्षक है दुष्टो की माता, रक्षक है भक्तो की,
जगजननी जग दुर्गा काली जय जय माता खप्पर वाली,
जय जय महा शक्ति महा देवी तेरी जय हो,
जय जय महा शक्ति महा देवी तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो,
जय अम्बे तेरी जय हो जगदम्बे तेरी जय हो....
श्रेणी : दुर्गा भजन
Jai Ambe I Devi Bhajan I MADHUSMITA I Full Audio Song
यह “जय अम्बे तेरी जय हो” एक भक्तिमय दुर्गा भजन है, जिसमें माँ अम्बे, जगदम्बा और आदिशक्ति की महिमा का गुणगान किया गया है। भजन की शुरुआत माता के जयकारे से होती है और उन्हें दुखियों का दुःख हरने वाली, सबका मंगल करने वाली और महाशक्ति के रूप में नमन किया गया है। इसमें माता के अनेक दिव्य स्वरूपों और नामों का स्मरण किया गया है, जैसे शेरावाली माँ, ज्योतावाली माँ, ममता वाली माँ, काली माता, वैष्णो माता, भवतारिणी और वरदानी माता। इस प्रकार भजन में देवी के विभिन्न रूपों को एक ही परम शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, शरणागति, शक्ति की आराधना और माता के प्रति अटूट विश्वास है। भक्त माता को अपनी पालनहार और रक्षक मानता है। “दुःख सबके हरती” और “रक्षक है भक्तों की” जैसी पंक्तियों में यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि माता अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनके जीवन के दुखों को दूर करने वाली हैं। वहीं माता को “दुष्टों की भक्षक” कहकर देवी के उस उग्र स्वरूप को दर्शाया गया है, जो अधर्म और बुरी शक्तियों का नाश करता है। इस तरह भजन में माँ के ममतामयी और करुणामयी रूप के साथ-साथ उनके शक्तिशाली और रौद्र रूप का भी वर्णन मिलता है।
भजन में वैष्णो देवी और पहाड़ों वाली माता का विशेष उल्लेख भी मिलता है। इससे माता के पवित्र धामों और उनके विभिन्न स्वरूपों के प्रति भक्त की आस्था प्रकट होती है। भक्त माता को जगजननी, जगदुर्गा और महाशक्ति कहकर उनके चरणों में नमन करता है और बार-बार उनकी जय बोलता है। भजन का लगातार दोहराया जाने वाला “जय अम्बे तेरी जय हो, जगदम्बे तेरी जय हो” जयकारा भक्त के मन में श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।