नवरात्रि का दिन आया है
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है,
मेरी माँ का दिन आज आया है,
नवरात्री का दिन आया है,
मेरे बिगड़े....माँ बिगड़े सवारे काज,
नवरात्री का दिन आया है,
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है.....
अब घड़ी सुहानी आ गयी,
माँ शेर पे चढ़के आ गयी,
तीनो लोक में माँ का राज़,
नवरात्री का दिन आया है,
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है.....
माँ दी ज्योत अखंड जगा ले तू,
श्रद्धा से माँ को मनाले तू,
रख लेगी माँ तेरी लाज,
नवरात्री का दिन आया है,
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है.....
धरती झूमे अम्बर झूमे,
सारे भगत प्यारे झूमें,
बाजे ढोलक मेंढक साज,
नवरात्री का दिन आया है,
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है.....
वैष्णो की महिमा निराली है,
‘लाडले’ की करे रखवाली है,
सुने दिल की घर इक आवाज़,
नवरात्री का दिन आया है,
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
मन को बड़ा सुकून देता हे ये भजन | नवरात्रि का दिन आया है " Mata Rani Ke Bhajan | Ladlaa Pawan #JMD
यह “नवरात्रि का दिन आया है” एक उत्साह और भक्तिभाव से भरपूर माता रानी एवं नवरात्रि भजन है, जिसमें नवरात्रि के पावन पर्व के आगमन की खुशी को बड़े ही आनंदमय तरीके से व्यक्त किया गया है। भजन में भक्तों से कहा गया है कि आज माता रानी का शुभ दिन आया है, इसलिए सभी भक्त खुशी से झूमें और नाचें। इसमें माता को शेर पर सवार होकर आने वाली जगदम्बे के रूप में स्मरण किया गया है और उनके तीनों लोकों में व्याप्त प्रभाव तथा महिमा का गुणगान किया गया है। भजन का वातावरण नवरात्रि के दौरान होने वाले उत्सव, जागरण और माता के जयकारों की याद दिलाता है।
इस भजन का मुख्य भाव भक्ति, उत्साह, आनंद, श्रद्धा और माता रानी पर अटूट विश्वास है। इसमें भक्तों को माता की अखंड ज्योत जलाने और श्रद्धा से उन्हें मनाने के लिए प्रेरित किया गया है। “रख लेगी माँ तेरी लाज” जैसी पंक्ति में भक्त का यह विश्वास दिखाई देता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से माता की शरण में जाता है, माता उसकी रक्षा करती हैं और उसके जीवन की कठिन परिस्थितियों में उसका साथ देती हैं। भजन में माता को भक्तों के बिगड़े हुए कामों को सुधारने वाली और उनकी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली करुणामयी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
भजन के एक अंतरे में “धरती झूमे, अंबर झूमे, सारे भक्त प्यारे झूमें” के माध्यम से नवरात्रि के उत्सव का सुंदर चित्रण किया गया है। ढोलक और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ भक्तों के नाचने-गाने और माता के जयकारे लगाने का भाव इसमें दिखाई देता है। यह भजन नवरात्रि के दौरान होने वाले जगराते, माता की चौकी और सामूहिक भक्ति कार्यक्रमों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त भाव रखता है। इसमें भक्ति के साथ उत्सव और आनंद का सुंदर मेल देखने को मिलता है।
भजन के अंतिम अंतरे में वैष्णो माता की महिमा का उल्लेख किया गया है। इसमें माता को अपने भक्तों की रखवाली करने वाली और उनके मन की आवाज सुनने वाली शक्ति के रूप में याद किया गया है। भक्त का विश्वास है कि माता अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनती हैं और उन्हें अपने संरक्षण में रखती हैं। इस प्रकार भजन में नवरात्रि के उत्सव के साथ माता रानी और वैष्णो देवी के प्रति श्रद्धा को भी जोड़ा गया है।