मैया जी तेरा जय जयकारा
मैया तेरे प्यार में तेरे इंतज़ार में,
ऐसा मेरा हाल कर दिया,
जहाँ जहाँ जाऊं जाके सर को झुकाऊं,
बस गूंजे सुबह शाम,
जय जयकारा मैया जी तेरा जय जयकारा....
तूने तो मैया बुलाया नहीं,
फिर ये ना कहना के मैं आया नहीं,
आऊं तो आऊं कैसे बता, तेरा बुलावा आया नहीं,
तेरे दर जाऊं तो मैं तुझको सुनाऊँ,
मैया तेरे पावन धाम का,
जय जयकारा मैया जी तेरा जय जयकारा.....
मैया ज़रा सुनले अर्ज़ी मेरी,
माने या ना माने मर्ज़ी तेरी,
अपने चरण की धूल बना ले,
बगिया का अपने फूल बना ले,
गुण गुण गाऊं, मैं तो ये ही धुन गाऊं,
लेके इकतारा तेरे नाम का,
जय जयकारा मैया जी तेरा जय जयकारा.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
जयकारा शेरावाली दा | Jaikara Sherawali Da | Maiya Rani latest Navratri Bhajan | Toshi Kaur | Full HD
यह “मैया जी तेरा जय जयकारा” एक भावपूर्ण दुर्गा भजन और माता रानी का भक्ति गीत है, जिसमें भक्त माँ शेरावाली के प्रति अपने प्रेम, विरह और उनके पवित्र दरबार में पहुंचने की तीव्र इच्छा को व्यक्त करता है। भजन में भक्त कहता है कि वह माता के प्रेम में इतना डूब गया है कि जहां भी जाता है, माता के चरणों में सिर झुकाना चाहता है और उसके मुख से हर समय माता के जयकारे ही निकलते हैं। “जय जयकारा मैया जी तेरा जय जयकारा” की पुनरावृत्ति भक्त के हृदय में माता के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को दर्शाती है।
इस भजन का मुख्य भाव माता के दर्शन की लालसा, शरणागति, प्रेम और माता के बुलावे पर अटूट विश्वास है। भक्त का मानना है कि माता का धाम जाने के लिए स्वयं माता का बुलावा आना आवश्यक है। “तूने तो मैया बुलाया नहीं, फिर ये ना कहना कि मैं आया नहीं” जैसी पंक्तियों में भक्त और माता के बीच एक बहुत ही आत्मीय संवाद दिखाई देता है। भक्त माता से शिकायत करते हुए भी उनके प्रति अपना प्रेम बनाए रखता है और कहता है कि यदि माता बुलाएंगी, तो वह उनके पावन धाम में पहुंचकर उनके चरणों में अपना सिर झुका देगा।
भजन के अंतिम अंतरे में भक्त माता के सामने अपनी विनम्र प्रार्थना रखता है। वह माता से अपने चरणों की धूल बना लेने और अपनी भक्ति को माता की बगिया के फूल के समान स्वीकार करने की इच्छा व्यक्त करता है। “लेके इकतारा तेरे नाम का” पंक्ति में भक्त का सरल और निष्कपट भक्ति भाव दिखाई देता है, जिसमें वह संसार की किसी बड़ी इच्छा के बजाय माता का नाम गाते हुए अपना जीवन बिताना चाहता है। यह भाव भक्त की पूर्ण समर्पण भावना और निष्काम भक्ति को दर्शाता है।