मैया से लगन लगी जबसे
मैया से लगन लगी जबसे,
लगी जब से,
मोहे दीवानी समझन लागी,
जा दुनिया तब से,
मैया से लगन लगी जबसे,
लगी जब से.....
पूजा पाठ और कुछ धरम नियम मै,
ना जानू मै ना जानू,
तेरी सुरतिया मन बसी माँ,
तुझको ही पना मानु,
भक्ति कि ज्योत जगी जब से,
जगी जब से,
मोहे दीवानी समझन लागी,
जा दुनिया तब से......
ममतामई दया कि देवी,
मुझपे तेरी नजर है,
मुझको क्या परवाह किसी कि,
दुनिया का क्या डर है,
तेर चरणों में मगन हुयी जब से,
मोहे दीवानी समझन लागी,
जा दुनिया तब से......
तेरा दर मिल जाये मुझे भी,
यही रटू पल पल मै,
मुझको भी एक बार छुपाले,
माँ अपने आँचल में,
तेरा नाम रटन मै लगी जब से,
मोहे दीवानी समझन लागी,
जा दुनिया तब से.......
श्रेणी : दुर्गा भजन
Maiyaa Se Lagan Lagi Jabse - SHAHNAZ AKHTAR 07089042601 - Lord Durga - HD Video
यह “मैया से लगन लगी जबसे” एक भावपूर्ण और आत्मसमर्पण से भरा हुआ माँ दुर्गा का भजन है, जिसमें भक्त अपने जीवन में माँ के प्रति जागी गहरी भक्ति और प्रेम का वर्णन करता है। भजन की मुख्य पंक्ति “मैया से लगन लगी जबसे, मोहे दीवानी समझन लागी जा दुनिया तब से” भक्त की उस अवस्था को दर्शाती है, जब वह संसार की परवाह छोड़कर पूरी तरह अपनी आराध्य माँ की भक्ति में लीन हो जाता है। भक्त के लिए माँ से जुड़ाव इतना गहरा हो गया है कि दुनिया उसे दीवानी समझने लगी है, लेकिन भक्त को इसकी कोई चिंता नहीं है।
इस भजन का मुख्य भाव माँ के प्रति प्रेम, भक्ति, समर्पण और संसार की परवाह से मुक्त होकर ईश्वर में लीन हो जाना है। भक्त स्वीकार करता है कि उसे पूजा-पाठ की सभी विधियों या धार्मिक नियमों का विशेष ज्ञान नहीं है, लेकिन उसके मन में माँ की सुंदर छवि बस गई है और वह माँ को ही अपना सब कुछ मानता है। “तेरी सुरतिया मन बसी माँ, तुझको ही अपना मानूँ” जैसी पंक्तियां बताती हैं कि सच्ची भक्ति केवल विधि-विधान तक सीमित नहीं होती, बल्कि हृदय में भगवान के प्रति सच्चा प्रेम और विश्वास होना भी भक्ति का एक महत्वपूर्ण रूप है।
भजन के दूसरे हिस्से में भक्त माँ को ममतामयी और दया की देवी कहकर संबोधित करता है। उसे विश्वास है कि माँ की कृपादृष्टि हमेशा उसके ऊपर बनी हुई है, इसलिए उसे दुनिया के किसी व्यक्ति या परिस्थिति से डरने की आवश्यकता नहीं है। “तेरे चरणों में मगन हुई जब से” का भाव यह है कि जब से भक्त ने स्वयं को माँ के चरणों में समर्पित किया है, तब से उसके भीतर एक अलग प्रकार की आध्यात्मिक प्रसन्नता और निर्भयता उत्पन्न हो गई है। अब उसका मन संसार की चिंता से अधिक माँ की भक्ति में लगा रहता है।
अंतिम अंतरे में भक्त की सबसे बड़ी इच्छा माँ के चरणों और उनके दरबार की शरण प्राप्त करना है। वह हर पल यही प्रार्थना करता है कि उसे माँ का दर मिल जाए और माँ उसे अपने आँचल में छिपाकर अपनी शरण दे दें। “माँ अपने आँचल में छुपा ले” का भाव बहुत ही वात्सल्यपूर्ण है, जिसमें भक्त स्वयं को माँ की संतान मानकर उनकी सुरक्षा और ममता की कामना करता है। यह पंक्ति माँ और भक्त के बीच के प्रेमपूर्ण और भावनात्मक संबंध को बहुत सुंदर तरीके से व्यक्त करती है।
कुल मिलाकर, “मैया से लगन लगी जबसे” एक ऐसा दुर्गा भजन है जिसमें भक्त अपनी आराध्य माँ के प्रति निष्कपट प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है। भजन का संदेश है कि जब मनुष्य के हृदय में ईश्वर के प्रति सच्ची लगन और प्रेम जाग जाता है, तब सांसारिक आलोचना और लोगों की बातें उसके लिए महत्वहीन हो जाती हैं। वह अपने आराध्य के चरणों में ही सुख, शांति और सुरक्षा अनुभव करता है। आपके दिए गए वीडियो शीर्षक के अनुसार यह भजन शहनाज़ अख्तर की प्रस्तुति के रूप में उपलब्ध है। हालांकि, मूल गीतकार या रचनाकार का नाम दिए गए विवरण में स्पष्ट नहीं है, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा।