मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली हैं
मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है,
वो फूल सुहाने, वो कलिया सुहानी,
मुझे लगती प्यारी, वो गलिया सुहानी,
उन गलियों में श्याम की, खुशबू घुली है,
मुझे लगती प्यारी, वो कुंज गली है,
मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है,
वो श्याम का दर्शन, वो श्याम की आंखें,
जो करती है अपने, भक्तों से बातें,
मेरी श्याम से जब से, आंखें मिली है,
मुझे लगती प्यारी, वो कुंज गली है,
मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है,
वो राधा का मोहन, वो मीरा का मोहन,
वो जिसके लिए, मीरा बन गई थी जोगन,
मुझे भी लगन, मीरा जैसी लगी है,
मुझे लगती प्यारी, वो कुंज गली है,
मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है,
मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली है,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली हैं, मुझे लगती प्यारी वो कुंज गली हैं, #bankebihari #vrindavan #radhe
यह “मुझे श्याम की जब से भक्ति मिली है” एक मधुर और भावपूर्ण श्रीकृष्ण भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण (श्याम) की भक्ति प्राप्त होने के बाद अपने जीवन में आए आध्यात्मिक परिवर्तन और वृंदावन के प्रति बढ़े प्रेम का वर्णन करता है। भजन में भक्त कहता है कि जब से उसे श्याम की भक्ति मिली है, तब से वृंदावन की कुंज गलियाँ, वहाँ के फूल, कलियाँ और पूरा वातावरण उसे अत्यंत प्रिय लगने लगा है। यह भजन दर्शाता है कि सच्ची भक्ति मनुष्य की दृष्टि बदल देती है और उसे हर स्थान पर भगवान का दिव्य स्वरूप दिखाई देने लगता है।
इस भजन का मुख्य भाव प्रेम-भक्ति, वृंदावन के प्रति अनुराग, आध्यात्मिक आनंद और पूर्ण समर्पण है। भक्त अनुभव करता है कि वृंदावन की प्रत्येक गली में श्याम की दिव्य उपस्थिति और प्रेम की सुगंध व्याप्त है। “उन गलियों में श्याम की खुशबू घुली है” जैसी पंक्तियाँ प्रतीकात्मक रूप से बताती हैं कि जहाँ भगवान की लीलाएँ हुई हैं, वहाँ का प्रत्येक कण भक्त के लिए पवित्र और आनंददायक बन जाता है। यहाँ वृंदावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्ति और दिव्य प्रेम का प्रतीक है।
भजन में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और उनकी करुणामयी दृष्टि का भी अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। भक्त कहता है कि जब से उसकी आँखें श्याम के दर्शन से मिली हैं, तब से उसका जीवन बदल गया है। उसे ऐसा अनुभव होता है मानो श्रीकृष्ण स्वयं अपने भक्तों से प्रेमपूर्वक संवाद करते हों। यह भाव भक्त और भगवान के बीच के गहरे आत्मिक संबंध को दर्शाता है, जहाँ केवल दर्शन ही मन को शांति, आनंद और संतोष से भर देते हैं।
अंतिम अंतरे में भगवान श्रीकृष्ण को राधा के मोहन और मीरा के आराध्य के रूप में स्मरण किया गया है। भक्त कहता है कि जिस प्रकार मीरा बाई श्रीकृष्ण के प्रेम में सब कुछ त्यागकर उनकी अनन्य भक्त बन गई थीं, उसी प्रकार उसके हृदय में भी वैसी ही लगन जाग उठी है। यहाँ मीरा का उदाहरण निष्काम, अटूट और समर्पित भक्ति का प्रतीक है। भजन यह संदेश देता है कि जब मनुष्य के हृदय में सच्ची भक्ति जागती है, तो संसार के आकर्षण स्वतः कम हो जाते हैं और भगवान का प्रेम ही जीवन का सबसे बड़ा धन बन जाता है।
Radhe - Radhe Sir ,
ReplyDeleteThanks,