ममतामयी दया कीजिये मेरी मैया
ममतामयी दया कीजिये मेरी मैया,
ममतामयी दया कीजिये,
ममतामयी दया कीजेए मेरी मैया,
चरणों से लगा लीजिये मेरी मैया,
ममतामयी दया कीजिये....
देके चरणों की सेवा हमें मेरी मैया,
मेरी किस्मत बना दीजिये मेरी मैया,
ममतामयी दया कीजिये....
छोड़ दर तेरा जाएँ कहाँ मेरी मैया,
अपने दर पे बुला लीजिये मेरी मैया,
ममतामयी दया कीजिये.....
दास सोनू को अपना बना के मेरी मैया,
भव से पार लगा दीजिये मेरी मैया,
ममतामयी दया कीजिये......
श्रेणी : दुर्गा भजन
ममतामयी दया कीजिये मेरी मैया | Mamtamayi Daya Keejiye | Beautiful Maiyarani Bhajan by Sonu Thakur
यह “ममतामयी दया कीजिये मेरी मैया” एक अत्यंत भावपूर्ण दुर्गा भजन और माता रानी की विनती है, जिसमें भक्त माँ को ममतामयी और दयालु स्वरूप मानकर उनके चरणों में शरण मांगता है। भजन की शुरुआत में भक्त बार-बार माता से दया करने और अपने चरणों से लगा लेने की प्रार्थना करता है। यहाँ भक्त का भाव पूरी तरह से समर्पण और विनम्रता का है। वह माता से संसार की भौतिक वस्तुओं की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि उनके प्रेम, कृपा और चरणों में स्थान पाने की इच्छा रखता है।
इस भजन का मुख्य भाव माँ की ममता, करुणा, शरणागति और भक्त की विनम्र प्रार्थना है। भक्त मानता है कि माता के चरणों की सेवा प्राप्त होना ही उसके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। “देके चरणों की सेवा हमें मेरी मैया, मेरी किस्मत बना दीजिये” जैसी पंक्तियों में यह भावना व्यक्त होती है कि यदि माता की सेवा और भक्ति का अवसर मिल जाए, तो जीवन सफल हो सकता है। भक्त के लिए माता की कृपा ही उसके जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति और सौभाग्य है।
भजन में माता के दरबार की महिमा और भक्त की पूर्ण निर्भरता भी दिखाई देती है। “छोड़ दर तेरा जाएँ कहाँ मेरी मैया” के माध्यम से भक्त कहता है कि माता के सिवा उसका कोई दूसरा सहारा नहीं है। वह माता से अपने दरबार में बुलाने और अपनी शरण में रखने की प्रार्थना करता है। यह भाव अनन्य भक्ति को दर्शाता है, जिसमें भक्त अपने सभी सांसारिक दुखों और परेशानियों के बीच माता को ही अपना सबसे बड़ा सहारा मानता है।
अंतिम अंतरे में “दास सोनू” नाम का उल्लेख मिलता है, जिसमें भक्त स्वयं को माता का दास मानकर उनसे भवसागर से पार लगाने की प्रार्थना करता है। यहाँ भवसागर का अर्थ संसार के मोह, दुख, कठिनाइयों और जन्म-मृत्यु के चक्र से लिया जा सकता है। भक्त का विश्वास है कि माता की कृपा और चरणों की शरण मिलने से जीवन की सभी कठिनाइयों से मुक्ति का मार्ग मिल सकता है। यह अंतरा भजन के समर्पण भाव को और अधिक गहरा बना देता है।