मईया नवरात्रों में जब धरती पे
मैया नवरात्रों में, जब धरती पे आती है,
किसको है क्या देना, ये सोच के आती है,
मैया नवरात्रों मे, जब धरती पे आती है......
पहले नवरात्रों में, माँ सबकी खबर लेती,
दूजे नवरात्रों में, अपने खाते में लिख लेती है,
तीजे नवरात्रों से, बात आगे बढ़ाती है,
मैया नवरात्रों मे, जब धरती पे आती है......
चौथे नवरात्रों में, माँ आसान लगाती है,
पाँचवे नवरात्रों में, माँ आ गयी बताती है,
छटे नवरात्रों में, सबको दर्शन कराती है,
मैया नवरात्रों मे, जब धरती पे आती है......
सतवे नवरात्रों में, खोल देती खजाने है,
अठवे नवरात्रों से, लग जाती लूटाने है,
नव्वे नवरात्रों में, दोनो हाथो से लुटाती है,
मैया नवरात्रों मे, जब धरती पे आती है......
दसवे दिन माता की, बिदाई जब आती है,
धरती के लोगो की, आँखे भर आती है,
रामा फिर आउंगी, वादा करके चली जाती है,
मैया नवरात्रों मे, जब धरती पे आती है.......
श्रेणी : दुर्गा भजन
Maiya Navratro Mein Jab Dharti Pe Aati Hai | मईया नवरात्रों में जब धरती पे आती है - माता भजन |Bhajan
यह “मैया नवरात्रों में जब धरती पे आती है” एक भावपूर्ण माता रानी और नवरात्रि भजन है, जिसमें नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान माँ दुर्गा के धरती पर आगमन और भक्तों पर उनकी कृपा का सुंदर भाव प्रस्तुत किया गया है। भजन में माता को ऐसी दयालु और करुणामयी शक्ति के रूप में दर्शाया गया है, जो नवरात्रि के दिनों में अपने भक्तों के लिए कुछ विशेष लेकर आती हैं। इसमें भक्त की यह श्रद्धा दिखाई देती है कि माता हर व्यक्ति की आवश्यकता और मनोकामना को जानती हैं और उसी के अनुसार अपनी कृपा बरसाती हैं।
इस भजन का मुख्य भाव माता के आगमन की खुशी, श्रद्धा, विश्वास और कृपा की प्रतीक्षा है। गीत में नवरात्रि के प्रत्येक दिन को एक अलग भाव से जोड़ा गया है। पहले नवरात्रि से लेकर छठे नवरात्रि तक माता के भक्तों की खबर लेने, उनकी मनोकामनाओं को जानने और दर्शन देने का भाव बताया गया है। यह वर्णन धार्मिक मान्यता और भक्तिभाव पर आधारित एक सुंदर काव्यात्मक कल्पना है, जिसमें भक्त यह अनुभव करता है कि नवरात्रि के दौरान माता उसके जीवन के दुख-सुख को देख रही हैं और उस पर अपनी कृपा करने वाली हैं।
सातवें, आठवें और नौवें नवरात्रि के वर्णन में माता की कृपा और आशीर्वाद को खजाना लुटाने के रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यहाँ “खजाना” केवल धन-संपत्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि माता की कृपा, सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का प्रतीक भी माना जा सकता है। भक्त का विश्वास है कि नवरात्रि के अंतिम दिनों में माता अपने भक्तों पर दोनों हाथों से आशीर्वाद बरसाती हैं। इस प्रकार भजन में माता की कृपा को असीम और अनमोल बताया गया है।
भजन का अंतिम अंतरा विशेष रूप से भावुक है, जिसमें दसवें दिन माता की विदाई का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। नवरात्रि समाप्त होने पर भक्तों की आँखों में आंसू आ जाते हैं और वे माता के फिर से आने की प्रतीक्षा करने लगते हैं। “फिर आऊंगी, वादा करके चली जाती है” जैसी पंक्ति में भक्त और माता के बीच के भावनात्मक संबंध को दर्शाया गया है। माता भले ही उत्सव के बाद विदा हो जाती हैं, लेकिन भक्त के मन में उनका विश्वास और भक्ति हमेशा बनी रहती है।