नचने दा मौसम है नचा लो श्याम धणी
श्याम धणी जी म्हारा श्याम धणी,
नचने दा मौसम है नचा लो श्याम धणी....
कितना सुंदर श्याम सजाया,
सांवरिये को बनड़ा बनाया,
सजने का मौसम है सजा लो श्याम धणी,
नचने दा मौसम है नचा लो श्याम धणी....
कीर्तन में सब धूम मचावो,
खूद नाचो घनश्याम नचावो,
कीर्तन का मौसम है रिझालो श्याम धणी,
नचने दा मौसम है नचा लो श्याम धणी....
दिल को दिल से मिला कर देखो,
आएगा वो बुलाकर देखो,
फागण का मौसम है नाच लो श्याम धणी,
नचने दा मौसम है नचा लो श्याम धणी....
रसिक अरज सुनले सांवरिया,
करता रहूँ तेरी चाकरिया,
मस्ती का मौसम है झुमालो श्याम धणी,
नचने दा मौसम है नचा लो श्याम धणी.....
श्रेणी : खाटु श्याम भजन
नचने दा मौसम है | खाटू श्याम भजन | by Teena Balotiya | New Shyam Bhajan | Audio
यह “नचने दा मौसम है, नचा लो श्याम धणी” एक जोश और भक्ति से भरपूर खाटू श्याम भजन है, जिसमें भक्त बाबा श्याम से प्रेमपूर्वक प्रार्थना करता है कि वे उसे अपनी भक्ति के आनंद में नचा लें। भजन में श्याम धणी को सुंदर रूप से सजाने, कीर्तन में भक्तों के साथ आनंद मनाने और बाबा की भक्ति में झूमने का भाव है। इसकी भाषा में हिंदी के साथ राजस्थानी और पंजाबी लोकभाषा की झलक दिखाई देती है, जिससे भजन का वातावरण और भी उत्साहपूर्ण बन जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव प्रेम भक्ति, आनंद, समर्पण और कीर्तन की मस्ती है। भक्त बाबा श्याम के सुंदर श्रृंगार की कल्पना करता है और उन्हें सांवरिया तथा बनड़े के रूप में निहारता है। “कितना सुंदर श्याम सजाया, सांवरिये को बनड़ा बनाया” जैसी पंक्तियों में बाबा के दिव्य श्रृंगार के प्रति भक्त का प्रेम दिखाई देता है। भक्त के लिए बाबा का श्रृंगार और उनका सुंदर स्वरूप केवल देखने का विषय नहीं, बल्कि भक्ति और आनंद में डूब जाने का माध्यम है।
भजन में कीर्तन और सामूहिक भक्ति का भी विशेष महत्व है। भक्त सभी श्रद्धालुओं को कीर्तन में शामिल होकर धूम मचाने, नाचने और घनश्याम को रिझाने के लिए प्रेरित करता है। “खुद नाचो घनश्याम नचावो” में यह भाव है कि जब भक्त सच्चे मन से बाबा की भक्ति में डूब जाता है, तो उसके भीतर आनंद और उत्साह अपने आप उमड़ने लगता है। भजन में फागण के मौसम का उल्लेख भी है, जो खाटू श्याम जी की भक्ति और फाल्गुन मेले से जुड़े उत्सवपूर्ण वातावरण की याद दिलाता है। इस समय भक्त बाबा के प्रेम में रंगकर नाचने-गाने और कीर्तन करने की भावना व्यक्त करते हैं।
अंतिम अंतरे में भक्त बाबा श्याम के सामने अपनी विनम्र इच्छा रखता है कि वह हमेशा उनकी सेवा करता रहे। “करता रहूँ तेरी चाकरिया” में भक्त का दास्य भाव और पूर्ण समर्पण दिखाई देता है। वह बाबा से केवल सांसारिक सुख नहीं मांगता, बल्कि उनकी भक्ति में लगातार डूबे रहने और उनके प्रेम में झूमते रहने की इच्छा रखता है। इस प्रकार भजन का संदेश है कि बाबा श्याम की सच्ची भक्ति में मनुष्य अपने दुख और चिंताओं को भूलकर प्रेम, आनंद और आध्यात्मिक उत्साह का अनुभव कर सकता है।