मंदिर के ताले खोल मेरी मैया
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे,
देवता शृंगार ले के आएंगे....
पैरों की पायल गणपति ने भेजी,
गणपति ने भेजी गणपति ने भेजी,
रिद्धि माँ ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे....
अंगो के साड़ी मैया जी ने भेजी,
मैया जी ने भेजी मैया जी ने भेजी,
सरवस्ती ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे.....
हाथो की चूड़ी विष्णु जी ने भेजी,
विष्णु जी ने भेजी विष्णु जी ने भेजी,
लक्ष्मी माँ ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे.....
गले के हार शिव शंकर जी ने भेजे,
शंकर जी ने भेजे शंकर जी ने भेजे,
गौर माँ ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे....
कानो की झुमके राम जी ने भेजे,
राम जी ने भेजे राम जी ने भेजे,
सीता माँ ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे....
नाक की नाथली कान्हा जी ने भेजी,
कान्हा जी ने भेजी कान्हा जी ने भेजी,
राधा रानी ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे....
माथे का टिका बह्मा जी ने भेजा,
बह्मा जी ने भेजा बह्मा जी ने भेजा,
बह्माणी ने दिया ताला तोड़ मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे,
मंदिर के ताले खोल मेरी मैया, देवता शृंगार ले के आएंगे......
श्रेणी : दुर्गा भजन
नवरात्रि गीत▹मंदिर के ताले खोल मेरी मैया देवता शृंगार ले के आएंगे || Mata Bhajan || Navratri Bhajan
यह “मंदिर के ताले खोल मेरी मैया” एक पारंपरिक भाव वाला दुर्गा भजन और नवरात्रि गीत है, जिसमें भक्त माता रानी से मंदिर के द्वार खोलने की प्रार्थना करता है। भजन की कल्पना बहुत सुंदर है—मानो माता के श्रृंगार के लिए स्वयं सभी देवी-देवता अलग-अलग आभूषण लेकर उनके दरबार में पहुंच रहे हों। इसमें गणपति जी द्वारा पायल, विष्णु जी द्वारा चूड़ी, शिव शंकर जी द्वारा हार, राम जी द्वारा झुमके, श्री कृष्ण द्वारा नथली और ब्रह्मा जी द्वारा माथे का टीका लाने का भाव प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार भजन में माता रानी को समस्त देवी-देवताओं की आराध्या और जगदम्बा के रूप में सम्मान दिया गया है।
इस भजन का मुख्य भाव माता रानी के प्रति प्रेम, श्रद्धा, सेवा और दिव्य श्रृंगार का भाव है। इसमें प्रत्येक अंतरे में माता के किसी विशेष आभूषण का उल्लेख करके यह कल्पना की गई है कि अलग-अलग देवी-देवता माता के श्रृंगार में अपना योगदान दे रहे हैं। इसके साथ ही रिद्धि, सरस्वती, लक्ष्मी, गौरी, सीता, राधा रानी और ब्रह्माणी जैसी देवी शक्तियों का भी उल्लेख मिलता है। यह भाव इस विचार को दर्शाता है कि सभी देवी-देवताओं की शक्तियां अंततः एक ही परम देवी शक्ति में समाहित हैं और माता रानी का श्रृंगार करना स्वयं एक दिव्य सेवा के समान है।
भजन में “मंदिर के ताले खोल” का भाव प्रतीकात्मक रूप से भी समझा जा सकता है। भक्त माता से उनके मंदिर के द्वार खोलने और दर्शन देने की विनती करता है, ताकि देवता उनके श्रृंगार के लिए लाए गए आभूषण अर्पित कर सकें। यह भक्त के मन में माता के दर्शन की उत्सुकता और उनके दिव्य स्वरूप को सजाने-संवारने की इच्छा को दर्शाता है। भजन का वातावरण नवरात्रि के दौरान होने वाली माता की चौकी, जागरण और विशेष श्रृंगार पूजा की याद दिलाता है।
इस भजन के मूल गीतकार या रचनाकार का नाम उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा। आपके दिए गए वीडियो शीर्षक के अनुसार यह “मंदिर के ताले खोल मेरी मैया” एक नवरात्रि गीत और माता रानी का भजन है। कुल मिलाकर, यह भजन माँ दुर्गा के दिव्य श्रृंगार, सभी देवी-देवताओं की माता के प्रति श्रद्धा और नवरात्रि की भक्तिमय भावना को सरल एवं लोकभक्ति शैली में प्रस्तुत करता है।