शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे
मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे,
शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे,
मेरी जुबां पे बस यही जाप रहे,
मेहरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे,
जबसे चढ़ी तेरे दर की ये पोडियां,
होने लगी दूर मेरी कमियां थी जेड़ियाँ,
ममता की छाँव में बिठाले एक बार माँ,
जी भर के नैनो में भर लूँ दीदार माँ,
माँ की ममता से घर आबाद रहे,
शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे,
हमको तो मिल गया तेरा माँ ठिकाना,
चैन सुकून का ये ही है खज़ाना,
सूनी सूनी ज़िन्दगी तूने महकाई,
भक्ति की अलख माँ तुमने जगाई,
माँ पे अडिग मेरा विश्वास रहे,
शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे,
दुखड़ा है क्या पल में पहचानती,
सच क्या है झूठ क्या माँ सब जानती,
राजीव को आवास ये यकीन है,
हुआ जो कहीं नहीं यहाँ मुमकिन है,
भक्ति का नशा दिन रात रहे,
शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे,
श्रेणी : दुर्गा भजन
शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे | Sherawali Tu Hamesha Mere Saath |Devi Bhajan 2022 | Rajeev Gandhi
यह “शेरावाली तू हमेशा मेरे साथ रहे” एक अत्यंत भावपूर्ण माँ दुर्गा (शेरावाली माता) का भजन है, जिसमें भक्त माता रानी से जीवनभर अपनी कृपा, संरक्षण और साथ बनाए रखने की प्रार्थना करता है। भजन में भक्त की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि माँ का हाथ सदैव उसके सिर पर रहे, उनकी कृपा कभी कम न हो और उसकी वाणी पर हर समय माता का नाम बना रहे। यह भजन पूर्ण विश्वास, समर्पण और माँ के प्रति अटूट श्रद्धा का सुंदर उदाहरण है।
इस भजन का मुख्य भाव माता की शरण, उनकी ममता, अटूट विश्वास और जीवनभर उनके संरक्षण की कामना है। भक्त कहता है कि जब से उसने माता के दरबार की सीढ़ियाँ चढ़ी हैं, तब से उसके जीवन की कमियाँ और कठिनाइयाँ धीरे-धीरे दूर होने लगी हैं। यह भाव दर्शाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मकता का संचार करती है। भक्त माता की ममता की छाया में बैठकर उनके दिव्य दर्शन का सुख प्राप्त करना चाहता है और अपने जीवन को उनके प्रेम से आलोकित देखना चाहता है।
भजन में माँ की ममता और करुणा का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है। भक्त स्वीकार करता है कि माता के चरणों में आने के बाद उसे जीवन का सच्चा ठिकाना, शांति और संतोष प्राप्त हुआ है। पहले जो जीवन सूना और निराशाजनक प्रतीत होता था, वह अब माता की कृपा से आनंद और भक्ति से भर गया है। इस प्रकार भजन यह संदेश देता है कि माता की सच्ची आराधना केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं करती, बल्कि मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक शांति भी प्रदान करती है।
अंतिम अंतरे में भक्त विश्वास के साथ कहता है कि माँ अपने प्रत्येक भक्त के दुःख को बिना कहे ही पहचान लेती हैं। उनके लिए सत्य और असत्य का ज्ञान स्पष्ट है तथा वे अपने भक्तों के जीवन में असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को भी संभव बना सकती हैं। अंत में भक्त यही कामना करता है कि उसके हृदय में दिन-रात माता की भक्ति का आनंद बना रहे और उसका विश्वास कभी डगमगाए नहीं। यह भजन भक्त और माता के बीच के प्रेम, विश्वास और आध्यात्मिक संबंध को अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।