श्याम से दिल का लगाना
राधे तू बड़ भागिनी कौन तपस्या कीन ।
तीन लोक तारण तरन सो तेरे आधीन ।।
श्याम से दिल का लगाना, कोई मजाक नहीं,
जीते जी जान से जाना, कोई मजाक नहीं,
श्याम से दिल का लगाना......
मोहब्बत जिनसे करते हैं, बिना देखे अचम्भा है,
मोहब्बत जिनसे करते हैं, बिना देखे अचम्भा है,
याद में आँसूं बहाना, कोई मजाक नहीं,
श्याम से दिल का लगाना.......
किसी के घर में लगी, आग तो देखी होगी,
किसी के घर में लगी, आग तो देखी होगी,
अपने घर आग लगाना, कोई मजाक नहीं,
श्याम से दिल का लगाना........
असर अगर आह में हो, पत्थर भी पिघल जाते हैं,
असर अगर आह में हो, पत्थर भी पिघल जाते हैं,
असर वो आह में लाना, कोई मजाक नहीं,
श्याम से दिल का लगाना.......
किसी को कुछ भी कह देना, आसान है मगर,
किसी को कुछ भी कह देना, आसान है मगर,
सबकी चुपचाप सह जाना, कोई मजाक नहीं,
याद में आंसू बहाना, कोई मजाक नही,
श्याम से दिल का लगाना, कोई मजाक नहीं,
जीते जी जान से जाना, कोई मजाक नहीं,
श्याम से दिल का लगाना........
श्रेणी : कृष्ण भजन
श्याम से दिल का लगाना ! Shyam Se Dil Ka Lagana ! Sadhvi Poornima Ji - Radhe Shyam Bhajan
यह “श्याम से दिल का लगाना” एक गहरे प्रेम, विरह और समर्पण भाव से भरा हुआ श्रीकृष्ण/श्याम भजन है। भजन की शुरुआत राधा रानी की महिमा से होती है और फिर भक्त को यह समझाया जाता है कि श्रीश्याम से सच्चा प्रेम करना कोई साधारण बात नहीं है। इसमें भगवान से प्रेम को सांसारिक प्रेम से अलग और अत्यंत गहरा आध्यात्मिक संबंध बताया गया है। भक्त जब श्याम को अपने हृदय से लगा लेता है, तो उसकी पूरी जीवन-यात्रा प्रभु की याद, प्रेम और विरह में बदल जाती है।
इस भजन का मुख्य भाव श्याम के प्रति प्रेम, भक्ति, विरह, समर्पण और प्रेम की कठिन साधना है। “श्याम से दिल का लगाना, कोई मजाक नहीं” की पंक्ति बार-बार यह संदेश देती है कि भगवान से सच्चा प्रेम केवल कह देने से नहीं होता, बल्कि इसके लिए मन और जीवन दोनों को प्रभु के प्रति समर्पित करना पड़ता है। यहां श्याम से प्रेम करने वाला भक्त अपने आराध्य को बिना देखे भी उनके प्रेम में डूबा रहता है और उनकी याद में आंसू बहाता है। यह भाव भक्त और भगवान के बीच के उस आध्यात्मिक प्रेम को दर्शाता है, जिसमें दूरी के बावजूद प्रभु की अनुभूति हृदय में बनी रहती है।
भजन में राधा रानी की विशेष महिमा भी दिखाई देती है। शुरुआती पंक्तियों में राधा जी को बड़े भाग्यशाली बताया गया है कि तीनों लोकों को तारने वाले श्रीश्याम उनके अधीन हैं। यह भाव राधा-कृष्ण की दिव्य प्रेम परंपरा से जुड़ा हुआ है, जहां राधा रानी को कृष्ण प्रेम की सर्वोच्च भक्त और प्रेम स्वरूप माना जाता है। इसीलिए भजन में श्याम से प्रेम करने की प्रेरणा के साथ राधा जी के प्रेम और तपस्या की ओर भी संकेत मिलता है।
इसके बाद भजन में विरह और प्रेम की पीड़ा को अलग-अलग उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। “किसी के घर में लगी आग तो देखी होगी, अपने घर आग लगाना कोई मजाक नहीं” जैसी पंक्तियां यह बताती हैं कि प्रेम की वास्तविक अग्नि को स्वयं अनुभव करना आसान नहीं होता। इसी प्रकार प्रभु की याद में आंसू बहाना और उनके लिए अपने मन में गहरी तड़प महसूस करना सच्चे प्रेम का प्रतीक माना गया है। भक्त के लिए श्याम का प्रेम इतना गहरा हो जाता है कि वह उनके स्मरण में अपने सुख-दुःख को भूलकर पूरी तरह प्रभु में लीन होने लगता है।
भजन में आह और सहनशीलता का भाव भी बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। “असर अगर आह में हो, पत्थर भी पिघल जाते हैं” के माध्यम से यह भाव व्यक्त किया गया है कि सच्चे हृदय से निकली पुकार में इतनी शक्ति होती है कि वह कठोर से कठोर हृदय को भी बदल सकती है। वहीं “सबकी चुपचाप सह जाना” भक्त के धैर्य और सहनशीलता को दर्शाता है। सच्चा प्रेम केवल आनंद का अनुभव नहीं है, बल्कि उसमें विरह, प्रतीक्षा, त्याग और कठिनाइयों को सहने की क्षमता भी आवश्यक होती है।
कुल मिलाकर, “श्याम से दिल का लगाना” एक ऐसा कृष्ण भजन है जो भक्त और भगवान के बीच के दिव्य प्रेम और विरह को केंद्र में रखता है। इसका संदेश है कि श्रीश्याम से सच्चा प्रेम करना एक गहरी आध्यात्मिक साधना है, जिसमें भक्त को अपने अहंकार और सांसारिक आसक्तियों से ऊपर उठकर प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण करना पड़ता है। भजन में राधा रानी की महिमा, श्याम प्रेम, विरह की पीड़ा, आंसुओं की भक्ति और सच्चे प्रेम की परीक्षा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। आपके दिए गए वीडियो शीर्षक के अनुसार यह भजन साध्वी पूर्णिमा जी की प्रस्तुति के रूप में जाना जाता है। हालांकि दिए गए विवरण में मूल गीतकार या रचनाकार का नाम स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका मूल लेखक बताना उचित नहीं होगा।