तू श्याम का सुमिंरन कर
तू श्याम का सुमिंरन कर, सब दुख कट जायेगा,
यही श्याम नाम तुझको, भव पार लगायेगा....
मिथ्या जग में कबसे, तूं पगले रहा है बोल,
तूं इनकी शरंण आके, हाथों जोड़ के बोल,
ये दास तुम्हारा अब, कहीं ओर ना जायेगा,
यही श्याम नाम तुझको भव पार लगायेगा,
तू श्याम का सुमिंरन कर....
कैसा भी समय आये कैसी भी घड़ी आये,
सच्चे हृदय से जो, सुमिरन इनका गाये,
हर विपदा में उसका, वो साथ निभायेगा,
यही शाम नाम तुझको भव पार लगायेगा,
तू श्याम का सुमिंरन कर....
कब जानें ढल जाये, दो पल का है जीवन,
भगवान के चरनों में, करदे तूं इसे अर्पंण,
तेरे साथ में बस केवल, यही नाम ही जायेगा,
यही शाम नाम तुझको भव पार लगायेगा,
तू श्याम का सुमिंरन कर......
श्रेणी : कृष्ण भजन
यह “तू श्याम का सुमिरन कर” एक भावपूर्ण श्री श्याम भजन है, जिसमें भक्त को भगवान श्री श्याम का निरंतर स्मरण और नाम-जप करने की प्रेरणा दी गई है। भजन का मूल संदेश यह है कि संसार के दुख, परेशानियाँ और कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी हों, यदि मनुष्य सच्चे हृदय से श्याम बाबा का स्मरण करता है और उनकी शरण में जाता है, तो उसे मानसिक शांति और प्रभु का सहारा प्राप्त होता है। “यही श्याम नाम तुझको भव पार लगायेगा” की पंक्ति भगवान के नाम की महिमा और आध्यात्मिक मुक्ति की भावना को प्रकट करती है।
इस भजन का मुख्य भाव श्याम भक्ति, नाम-स्मरण, शरणागति और ईश्वर पर अटूट विश्वास है। भजन में संसार को मिथ्या और अस्थायी बताते हुए भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर श्याम बाबा की शरण में जाने की प्रेरणा दी गई है। “ये दास तुम्हारा अब कहीं और ना जायेगा” जैसे भाव में भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है। वह मानता है कि संसार में कोई भी स्थायी सहारा नहीं है और अंततः भगवान का नाम ही मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा आधार बनता है।
दूसरे अंतरे में भजन यह संदेश देता है कि जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों और समय कितना भी कठिन क्यों न हो, जो व्यक्ति सच्चे हृदय से श्याम बाबा का सुमिरन करता है, उसे बाबा का साथ अवश्य मिलता है। यहां श्याम बाबा को ऐसे करुणामयी और भक्तवत्सल देव के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अपने भक्त को विपत्ति के समय अकेला नहीं छोड़ते। यह भाव भक्त के मन में विश्वास और आशा उत्पन्न करता है कि कठिन समय में भी प्रभु का नाम उसके साथ बना रहेगा।
अंतिम अंतरे में मानव जीवन की क्षणभंगुरता का भाव सामने आता है। “दो पल का है जीवन” कहकर मनुष्य को यह याद दिलाया गया है कि जीवन स्थायी नहीं है, इसलिए इसे केवल सांसारिक इच्छाओं और मोह-माया में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। अपने जीवन को भगवान के चरणों में समर्पित करके उनका नाम स्मरण करना ही सच्चे अर्थों में जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग बताया गया है। भजन का भाव है कि जब जीवन का अंत होगा, तब सांसारिक वस्तुएँ और संबंध साथ नहीं जाएंगे, बल्कि भगवान का नाम और उनके प्रति की गई भक्ति ही मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा का आधार बनेगी।
कुल मिलाकर, “तू श्याम का सुमिरन कर” एक प्रेरणादायक श्री श्याम भजन है, जो भक्तों को श्याम बाबा के नाम का जाप करने, उनकी शरण में रहने और जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी विश्वास बनाए रखने का संदेश देता है। भजन में संसार की नश्वरता, श्याम नाम की महिमा, प्रभु की शरण और भवसागर से पार होने जैसे आध्यात्मिक भावों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए प्रेरणादायक है जो अपने जीवन में श्याम बाबा को अपना सहारा मानते हैं और मानते हैं कि सच्चे मन से किया गया श्याम नाम का सुमिरन मनुष्य को दुःखों से उबरने की शक्ति और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। उपलब्ध पाठ के आधार पर यह कृष्ण भजन की श्रेणी में दिया गया है, हालांकि इसमें विशेष रूप से श्री श्याम बाबा की भक्ति का भाव प्रमुख है। इसके मूल गीतकार या रचनाकार का नाम उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा।