सीता पंचवटी पर रोवे लक्ष्मण राम
सीता पंचवटी पर रोवे लक्ष्मण राम राम राम,
लक्ष्मण राम राम राम लक्ष्मण राम राम राम,
सीता पंचवटी पर रोवे.....
तूने कैसी रची विधाता, मेरे कुछ भी समझ नहीं आता,
रावण दुष्ट अरे ले जाता अपने धाम धाम धाम,
सीता पंचवटी पर रोवे.....
हे बन के पंछी सुन लेना, मेरी शुद्ध रामा को देना,
हाथों के कंगना पर्वत से नीचे डार डार डार,
सीता पंचवटी पर रोवे.....
जो प्रभु आप अगर नहीं आए, तो जीवित सीता को ना पाए,
फिर सिर धुन धुन के पछताओ लेकर नाम नाम नाम,
सीता पंचवटी पर रोवे......
अब प्रभु आप खबर ले ओ मेरी, कपिला गाय सिंह ने घेरी,
सीता है चरणों की दासी तुमरे पांव पांव पांव,
सीता पंचवटी पर रोवे लक्ष्मण राम राम राम.....
श्रेणी : राम भजन
यह “सीता पंचवटी पर रोवे लक्ष्मण राम” एक अत्यंत भावपूर्ण राम भजन है, जिसमें माता सीता के हरण के बाद श्रीराम और लक्ष्मण की व्यथा तथा सीता की खोज के प्रसंग को करुण भाव में प्रस्तुत किया गया है। भजन की पंक्तियों में पंचवटी का वह दुखद वातावरण दिखाई देता है, जहां माता सीता के न मिलने पर राम और लक्ष्मण अत्यंत व्याकुल होकर उन्हें खोजते हैं। बार-बार “राम राम राम” का उच्चारण भजन में पीड़ा के साथ-साथ प्रभु के नाम का स्मरण भी कराता है।
इस भजन का मुख्य भाव करुणा, विरह, चिंता, प्रेम और श्रीराम के प्रति गहरी श्रद्धा का है। लक्ष्मण के माध्यम से कही गई पंक्तियों में विधाता की लीला को समझ न पाने की पीड़ा दिखाई देती है। रावण द्वारा सीता को ले जाने का समाचार और उनके वापस न मिलने की चिंता राम-लक्ष्मण के मन की व्याकुलता को सामने लाती है। भक्त की दृष्टि से यह प्रसंग भगवान के मानवीय स्वरूप और उनके भीतर दिखाई देने वाले प्रेम-विरह को बहुत मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है।
भजन में पक्षी और प्रकृति को संदेशवाहक बनाने की कल्पना भी दिखाई देती है। लक्ष्मण पक्षी से कहते हैं कि यदि वह सीता के बारे में कुछ जानता हो तो उनकी खबर राम तक पहुंचाए। हाथों के कंगन और अन्य संकेतों का उल्लेख सीता की खोज के प्रसंग को और भावुक बनाता है। इस प्रकार भजन केवल राम और लक्ष्मण की चिंता नहीं बताता, बल्कि पंचवटी के पूरे वातावरण को सीता-विरह की पीड़ा से जोड़ देता है।
अंतिम पंक्तियों में भक्तिभाव और भी गहरा हो जाता है, जहां सीता को श्रीराम के चरणों की दासी कहकर उनके प्रति पूर्ण समर्पण व्यक्त किया गया है। “तुमरे पांव” जैसी अभिव्यक्ति माता सीता के श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम और दांपत्य भक्ति को दर्शाती है। भजन का संदेश यह है कि सच्चे प्रेम और भक्ति में विरह की पीड़ा भी भगवान के नाम के स्मरण से जुड़ी रहती है।