भोले बाबा की निकली सवारी सब नाच रहे नर नारी, Bhole Baba Ki Nikli Sawari, Sab Nach Rahe Nar Nari

भोले बाबा की निकली सवारी सब नाच रहे नर नारी



भोले बाबा की निकली सवारी,
सब नाच रहे, नर नारी,

आगे आगे देव चल रहे,
पीछे चल रहे हैं त्रिपुरारी,
सब नाच रहे नर नारी,

भोले बाबा की निकली सवारी,
सब नाच रहे, नर नारी,

हाथ में डमरू, शीश पे चंदा,
गले में उनके नाग भुजंगा,
नन्दी पे बैठे हैं त्रिपुरारी,
सब नाच रहे नर नारी,

भोले बाबा की निकली सवारी,
सब नाच रहे, नर नारी,

जल्दी चलो जरा नन्दी बाबा,
बेचैन हैं आज भोले बाबा,
आज मिलन की आई हैं बारी,
सब नाच रहे नर नारी,

भोले बाबा की निकली सवारी,
सब नाच रहे, नर नारी,

सज धज कर गोरी मय्या खड़ी हैं,
थाल सजाकर मेना देवी भी खड़ी हैं,
अब आरती करने की आई बारी,
सब नाच रहे नर नारी,

भोले बाबा की निकली सवारी,
सब नाच रहे, नर नारी,

बाबा और मय्या दोनों खड़े हैं,
दोनों के मन आज फिर से जुड़े हैं,
अब मिलन की आई हैं बारी,
सब नाच रहे नर नारी,

भोले बाबा की निकली सवारी,
सब नाच रहे, नर नारी,

Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore



श्रेणी : शिव भजन



शिवरात्रि भजन 2026 ।। भोले बाबा की निकली सवारी ।। #shivratri #shiv #bholenath #bholebaba #shivbhajan

यह भजन “भोले बाबा की निकली सवारी” भगवान शिव की दिव्य बारात और उनके पावन मिलन का अत्यंत उत्सवमय चित्रण करने वाला सुंदर शिव भजन है, जिसे Jay Prakash Verma (Indore) जी ने रचा है। यह भजन खास तौर पर शिवरात्रि जैसे पावन अवसरों की खुशी, भक्ति और उल्लास को जीवंत कर देता है।

भजन में भोले बाबा की सवारी का मनोहारी दृश्य उभरता है — देवताओं की अगुवाई में त्रिपुरारी नंदी पर विराजमान हैं, हाथ में डमरू, शीश पर चंद्रमा और गले में नाग भुजंग सजे हैं। यह वर्णन भगवान शिव के अद्वितीय और विराट स्वरूप को बड़ी सुंदरता से प्रस्तुत करता है। “सब नाच रहे नर नारी” की पुनरावृत्ति पूरे भजन में उत्सव और आनंद का वातावरण बना देती है, मानो सम्पूर्ण सृष्टि इस दिव्य क्षण की साक्षी हो।

आगे के अंतरों में माता पार्वती के श्रृंगार और उनके मिलन की प्रतीक्षा का भावपूर्ण चित्रण है। गोरी मय्या और मेना देवी आरती की थाल सजाकर खड़ी हैं, और यह दृश्य शिव-पार्वती के पवित्र मिलन की पावन घड़ी को दर्शाता है। कवि ने इस मिलन को केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद के महोत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है।

यह भजन शिवरात्रि की महिमा, शिव-पार्वती के दिव्य प्रेम और भक्तों के उल्लास का अद्भुत संगम है। Jay Prakash Verma जी की रचना श्रोताओं को भक्ति में डुबो देती है और ऐसा अनुभव कराती है जैसे वे स्वयं भोले बाबा की सवारी में शामिल होकर नृत्य कर रहे हों।

Harshit Jain

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