मेरी चुनर पे रंग गयो डाल
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
निकली थी ओढ़ के में पीली चुनरिया,
जाने कहा से सखी आयो कन्हैया,
निकली थी ओढ़ के में पीली चुनरिया,
जाने कहा से सखी आयो कन्हैया,
पीली मेरी चुनर को कर गयो लाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
विनती करी मेने हाथ जोड़ के,
कोशिश करी मेने बचने की दोड़ के,
विनती करी मेने हाथ जोड़ के,
कोशिश करी मेने बचने की दोड़ के,
पीछे पीछे दोड़ा वो तो ले के गुलाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
कुछ भी सखी में कर ना पाई,
जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,
कुछ भी सखी में कर ना पाई,
जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,
सखी मल गयो मेरे मुख पे गुलाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,
यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : होली भजन
होली भजन 2026 ।। मेरी चुनर पे रंग गयो डाल ।। #holi #holispecial #holi2026 #holibhajan #radhekrishna
मेरी चुनर पे रंग गयो डाल” एक बेहद मधुर और रसपूर्ण होली भजन है, जिसमें राधा-कृष्ण की होली लीला का सजीव और मनमोहक चित्रण किया गया है। इस भजन के रचयिता Jay Prakash Verma हैं, जिन्होंने बड़ी सरल, भावनात्मक और ब्रज भाषा की मिठास से भरी पंक्तियों में इस लीला को शब्दों में पिरोया है। भजन में एक सखी की दृष्टि से उस पल का वर्णन है जब वह पीली चुनरिया ओढ़कर निकली थी, लेकिन नंदलाल ने आकर उस पर प्रेम और शरारत का रंग डाल दिया। “यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल” जैसी पंक्तियाँ न केवल कृष्ण की बाल-लीलाओं की याद दिलाती हैं, बल्कि श्रोताओं के मन में वृंदावन की होली का जीवंत दृश्य भी रच देती हैं। इसमें विनती, लज्जा, प्रेम और चंचलता—चारों भावों का सुंदर संगम है, जहाँ एक ओर सखी बचने की कोशिश करती है, तो दूसरी ओर कान्हा गुलाल लेकर पीछे-पीछे दौड़ते हैं। यह भजन केवल रंगों की होली नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद की होली का प्रतीक है, जो हर भक्त के हृदय को श्रीकृष्ण के रंग में रंग देता है और होली के उत्सव को आध्यात्मिक उल्लास से भर देता है।
Harshit Ji ,
ReplyDeleteRadhe Radhe !!