रंगों की बहार हैं होली का त्यौहार हैं
रंगो की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
लाल, गुलाबी, पीला, रंग में लगाऊ,
होली ये कान्हा, तेरे संग में मनाऊ,
मुझको तुझसे प्यार हैं, तू मेरा दिलदार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
रंगो की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
रंग रंगीला हैं तू, छेल छबीला हैं,
मुझको पता हैं तू, बड़ा ही रंगीला हैं,
तुझको भी मुझसे प्यार हैं, तू मेरा दिलदार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
रंगो की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
पिछले बरस की होली, याद हैं मुझको,
कितना सताया कान्हा, तूने मुझको,
फिर भी तुझसे प्यार हैं, तू मेरा दिलदार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
रंगो की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं,
आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : होली भजन
रंगों की बहार हैं । होली का त्यौहार हैं ।। राधा कृष्ण होली भजन 2026 ।। #radhekrishna #holi #holi2026
रंगों की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं” एक मनभावन और प्रेमरस से सराबोर होली भजन है, जिसमें राधा का अपने प्रियतम कान्हा के लिए इंतज़ार बड़े ही सरल और मधुर शब्दों में व्यक्त किया गया है। इस भजन के रचयिता Jay Prakash Verma हैं, जिन्होंने ब्रज की चंचलता, प्रेम की कोमलता और होली की उमंग को एक साथ पिरो दिया है। हर अंतरे में राधा का स्नेह, शरारतों की याद और कान्हा के रंगीले स्वभाव का सुंदर वर्णन मिलता है। “लाल, गुलाबी, पीला रंग में लगाऊ” जैसी पंक्तियाँ केवल रंगों का उल्लेख नहीं करतीं, बल्कि प्रेम के अलग-अलग भावों को दर्शाती हैं। पिछले बरस की होली की यादें इस भजन को और भी जीवंत बना देती हैं, जहाँ कान्हा की छेड़छाड़ में भी अपनापन और गहरा स्नेह झलकता है। यह भजन होली को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम मिलन का उत्सव बनाकर प्रस्तुत करता है, जो हर भक्त के मन में भक्ति, आनंद और प्रेम के रंग भर देता है।