मोहे घुंघरू बना ले कान्हा तेरे कोमल पांव के
मोहे घुंघरू बना ले कान्हा, तेरे कोमल पांव के,
पड़ा रहु रात दिन, तेरे चरणों की छांव में,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब तू चलेगा, मैं छम छम बोलूंगा,
तेरे संग संग सारे, बृज में मैं डोलूंगा,
जब जब तू चलेगा, मैं छम छम बोलूंगा,
तेरे संग संग सारे, बृज में मैं डोलूंगा,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब यशोदा मय्या, तुझे गोदी में सुलाएगी,
तेरे संग मुझे भी, मां की गोद मिल जाएगी,
जब जब यशोदा मय्या, तुझे गोदी में सुलाएगी,
तेरे संग मुझे भी, मां की गोद मिल जाएगी,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब नन्द बाबा, तुझे कांधे पे बिठाएंगे,
छू के उनके दिल को, मेरे भाग खुल जाएंगे,
जब जब नन्द बाबा, तुझे कांधे पे बिठाएंगे,
छू के उनके दिल को, मेरे भाग खुल जाएंगे,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब राधा तेरे, चरण दबाएगी,
छुके उनके हाथों को, मेरी जिंदगी बन जाएगी,
जब जब राधा तेरे, चरण दबाएगी,
छुके उनके हाथों को, मेरी जिंदगी बन जाएगी,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब राधा संग, तू रास रचाएगा,
पैरों का ये घुंघरू भी, राधे-राधे गाएगा,
जब जब राधा संग, तू रास रचाएगा,
पैरों का ये घुंघरू भी, राधे-राधे गाएगा,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब यमुना जी में, तू डुबकी लगाएगा,
पैरों के इन घुंघरू को भी, अमृत मिल जाएगा,
जब जब यमुना जी में, तू डुबकी लगाएगा,
पैरों के इन घुंघरू को भी, अमृत मिल जाएगा,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
जब जब गोपियों का तू, माखन चुराएगा,
इन प्यासे घुंघरू को भी, माखन मिल जाएगा,
जब जब गोपियों का तू, माखन चुराएगा,
इन प्यासे घुंघरू को भी, माखन मिल जाएगा,
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
कान्हा, कान्हा, कान्हा, कान्हा
दूर मत करना कभी, अपने चरणों से,
नहीं तो ये दास तेरा, जी नहीं पाएगा,
दूर मत करना कभी, अपने चरणों से,
नहीं तो ये दास तेरा, जी नहीं पाएगा,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
मोहे घुंघरू बना ले कान्हा, तेरे कोमल पांव के #krishna #radhekrishna #radheradhe #radhe #bankebihari
यह भावपूर्ण कृष्ण भजन “मोहे घुंघरू बना ले कान्हा” जय प्रकाश वर्मा द्वारा रचित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम की चरम अवस्था को दर्शाया गया है। इस भजन में भक्त की सबसे बड़ी इच्छा यह है कि वह स्वयं घुंघरू बनकर कृष्ण के चरणों में सदा के लिए जुड़ा रहे, ताकि हर पल वह उनके साथ रह सके। जब कान्हा चलते हैं तो घुंघरू की तरह उनकी हर चाल में झंकार बनकर गूंजे, बृज में उनके साथ घूमे और उनके हर लीला क्षण का हिस्सा बने।
भजन में आगे भक्त यह भाव व्यक्त करता है कि जब यशोदा मैया उन्हें गोद में सुलाएं, या नन्द बाबा उन्हें कंधे पर बिठाएं, तब वह भी उसी स्नेह और कृपा का अनुभव कर सके। जब राधा उनके चरण दबाएं या उनके साथ रास रचाएं, तब वह घुंघरू बनकर उस दिव्य प्रेम में शामिल हो जाए। यहां तक कि यमुना स्नान, माखन चोरी जैसी लीलाओं में भी वह उनके साथ रहकर उस आनंद और अमृत का भागी बनना चाहता है।
इस भजन का मुख्य भाव “दास्य भक्ति” और “पूर्ण समर्पण” है, जहां भक्त अपने अस्तित्व को मिटाकर भगवान के चरणों में ही बस जाना चाहता है। वह कहता है कि प्रभु उसे कभी अपने चरणों से दूर न करें, क्योंकि उनके बिना उसका जीवन अधूरा है। यह भजन सिखाता है कि सच्ची भक्ति में भक्त की सबसे बड़ी इच्छा भगवान के पास रहना और उनकी सेवा में लीन होना होती है।
हर्षित सर,
ReplyDeleteराधे राधे 🙏🙏
आपका हृदय से धन्यवाद।। आपकी लेखन शैली भी बहुत ही प्यारी हैं, प्रभु आपको सदा स्वस्थ रखें और भक्ति मार्ग में लगाए रखे।। राधे राधे