मुरलीवाले मुझे तू बता दे जरा, जादू तूने ये मुझपे कैसा किया, Murliwale Mujhe Tu Bata De Jara

मुरलीवाले मुझे तू बता दे जरा, जादू तूने ये मुझपे कैसा किया



मुरलीवाले, मुझे तू बता दे जरा,
जादू तूने, ये मुझपे कैसा किया,
राधे राधे जपे, मन मेरा बांवरा,
राधे राधे जपे, मन मेरा बांवरा,
मुझको हर एक जगह, बस दिखे सांवरा,

बंद आंखो से देखु, दिखे सांवरा,
आंखे खोलू, तो मुझको दिखे सांवरा,
बंद आंखो से देखु, दिखे सांवरा,
आंखे खोलू, तो मुझको दिखे सांवरा,
जादू जब से चढ़ा, मैं हुआ बांवरा,
मुझको हर एक जगह, बस दिखे सांवरा,

मुरलीवाले, मुझे तू बता दे जरा,
जादू तूने, ये मुझपे कैसा किया,

कुंज गलियों में देखु, दिखे सांवरा,
फूल कलियों में देखे, दिखे सांवरा,
कुंज गलियों में देखु, दिखे सांवरा,
फूल कलियों में देखे, दिखे सांवरा,
जादू जब से चढ़ा, मैं हुआ बांवरा,
मुझको हर एक जगह, बस दिखे सांवरा,

मुरलीवाले, मुझे तू बता दे जरा,
जादू तूने, ये मुझपे कैसा किया,

जब में राधा को देखु, दिखे सांवरा,
जब में मीरा को देखु, दिखे सांवरा
जब में राधा को देखु, दिखे सांवरा,
जब में मीरा को देखु, दिखे सांवरा
जादू जब से चढ़ा, मैं हुआ बांवरा,
मुझको हर एक जगह, बस दिखे सांवरा,

मुरलीवाले, मुझे तू बता दे जरा,
जादू तूने, ये मुझपे कैसा किया,

जब में माखन को देखु, दिखे सांवरा,
जब में मिश्री को देखु, दिखे सांवरा,
जब में माखन को देखु, दिखे सांवरा,
जब में मिश्री को देखु, दिखे सांवरा,
जादू जब से चढ़ा, मैं हुआ बांवरा,
मुझको हर एक जगह, बस दिखे सांवरा,

मुरलीवाले, मुझे तू बता दे जरा,
जादू तूने, ये मुझपे कैसा किया,

जब में गोकुल में देखु, दिखे सांवरा,
जब में मथुरा में देखु, दिखे सांवरा,
जब में गोकुल में देखु, दिखे सांवरा,
जब में मथुरा में देखु, दिखे सांवरा,
जादू जब से चढ़ा, मैं हुआ बांवरा,
मुझको हर एक जगह, बस दिखे सांवरा,

मुरलीवाले, मुझे तू बता दे जरा,
जादू तूने, ये मुझपे कैसा किया,

Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore



श्रेणी : कृष्ण भजन



मुरलीवाले मुझे तू बता दे जरा, जादू तूने ये मुझपे कैसा किया #bankebihari #radheradhe #radhe #bhajan

यह मधुर कृष्ण भजन “मुरलीवाले मुझे तू बता दे जरा” जय प्रकाश वर्मा द्वारा रचित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम का भाव प्रकट होता है। इस भजन में एक भक्त अपनी स्थिति को व्यक्त करता है कि जब से उस पर कृष्ण के प्रेम का “जादू” चढ़ा है, तब से उसका मन पूरी तरह से उनके रंग में रंग गया है। उसे हर जगह—आंखें बंद करने पर भी और खोलने पर भी—सिर्फ सांवरे कृष्ण ही दिखाई देते हैं। चाहे कुंज गलियां हों, फूल-कलियां हों, माखन-मिश्री हो या गोकुल-मथुरा, हर दृश्य में उसे कृष्ण का ही दर्शन होता है। यहां तक कि जब वह राधा और मीरा बाई को देखता है, तब भी उसे उनमें कृष्ण का ही स्वरूप नजर आता है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि सच्ची भक्ति में भक्त और भगवान के बीच इतना गहरा प्रेम और एकाग्रता हो जाती है कि भक्त को हर वस्तु और हर स्थान में केवल भगवान का ही अनुभव होने लगता है—वह पूरी तरह “बांवरा” होकर ईश्वर में लीन हो जाता है।

Harshit Jain

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