जब से मिली नजर वो मेरे दिल में बस गए
जब से मिली नजर, वो मेरे दिल में बस गए,
ऐसा हुआ असर, वो मेरे दिल में बस गए,
जब से मिली नजर, वो मेरे दिल में बस गए,
जब उन्हें देखा पहली बार, उनसे जुड़ गए दिल के तार,
जब उन्हें देखा पहली बार, उनसे जुड़ गए दिल के तार,
उनके बिना अब रह नहीं पाऊ, मुझको हो गया उनसे प्यार,
उनके बिना अब रह नहीं पाऊ, मुझको हो गया उनसे प्यार,
ऐसा हुआ असर, वो मेरे दिल में बस गए,
जब से मिली नजर, वो मेरे दिल में बस गए,
उनके पास में जाने लगी, उनसे नजरे मिलाने लगी,
उनके पास में जाने लगी, उनसे नजरे मिलाने लगी,
कह ना सकी कुछ भी उनसे, मन ही मन उन्हें चाहने लगी,
कह ना सकी कुछ भी उनसे, मन ही मन उन्हें चाहने लगी,
ऐसा हुआ असर, वो मेरे दिल में बस गए,
जब से मिली नजर, वो मेरे दिल में बस गए,
में तो उनकी राधा हूँ, वो तो है श्याम मेरे,
में तो उनकी राधा हूँ, वो तो है श्याम मेरे,
जितनी में दीवानी हूँ, उतने दीवाने वो मेरे,
जितनी में दीवानी हूँ, उतने दीवाने वो मेरे,
ऐसा हुआ असर, वो मेरे दिल में बस गए,
जब से मिली नजर, वो मेरे दिल में बस गए,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
जब से मिली नजर वो मेरे दिल में बस गए 💕 #radhekrishna #radhe #krishnabhajan #krishna #radheradhe
यह मधुर और भावनात्मक कृष्ण भजन “जब से मिली नजर वो मेरे दिल में बस गए” प्रसिद्ध भजन लेखक Jay Prakash Verma द्वारा रचित है, जो Indore से संबंध रखते हैं। इस भजन में एक भक्त के हृदय में उत्पन्न हुए प्रथम प्रेम और भक्ति की भावना को बहुत ही कोमल और सुंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है।
भजन का मुख्य भाव Radha और Krishna के दिव्य प्रेम पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि जब भक्त की नजर अपने आराध्य से मिलती है, तो उसका मन पूरी तरह उनसे जुड़ जाता है और वह अपने जीवन का हर पल उन्हीं के नाम कर देता है। “पहली नजर में दिल के तार जुड़ जाना” इस बात का प्रतीक है कि सच्चा प्रेम और भक्ति बिना किसी प्रयास के अपने आप हृदय में बस जाते हैं।
भजन में आगे यह भाव आता है कि भक्त अपने आराध्य के करीब जाने लगता है, उनसे नजरें मिलाने लगता है, लेकिन अपने प्रेम को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता—यह एक सच्चे और निष्कलंक प्रेम की निशानी है। मन ही मन भगवान को चाहना, उन्हें याद करना और हर पल उनका अनुभव करना ही इस भक्ति का सार है।
अंत में “मैं तो उनकी राधा हूँ, वो तो है श्याम मेरे” पंक्ति इस भजन को और भी गहराई देती है। इसमें भक्त स्वयं को राधा के रूप में अनुभव करता है और भगवान को अपना श्याम मानकर उनके साथ एक आत्मिक संबंध स्थापित करता है। यह दर्शाता है कि भक्त और भगवान के बीच का प्रेम केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि एक गहरे आत्मिक जुड़ाव का रूप ले लेता है।