चलो बुलावा आया है राधा ने बुलाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
जिसने राधा को याद किया, उसका बेड़ा पार लगाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
बरसाने की गलियों में, प्रेम की धारा बहती है
बरसाने की गलियों में, प्रेम की धारा बहती है
राधा नाम की माला से, हर मुश्किल राह सुलझती है
राधा नाम की माला से, हर मुश्किल राह सुलझती है
जो भी सच्चे मन से पुकारे, उसने फल पाया है॥
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है॥
राधा रानी दया की सागर, सबकी झोली भरती हैं
राधा रानी दया की सागर, सबकी झोली भरती हैं
सूने दिल के आँगन में, खुशियों के दीप जलती है
सूने दिल के आँगन में, खुशियों के दीप जलती हैं
जिसने चरणों में सिर झुकाया, उसने सुख पाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है॥
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है॥
नाम तुम्हारा अमृत जैसा, हर रोग मिटा देता है
नाम तुम्हारा अमृत जैसा, हर रोग मिटा देता है
भटके हुए राही को, सच्चा रास्ता दिखा देता है
भटके हुए राही को, सच्चा रास्ता दिखा देता है
राधा नाम की महिमा ने, सबको राह दिखाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है॥
श्रीजी की कृपा से ही, हर काम सफल हो जाता
श्रीजी की कृपा से ही, हर काम सफल हो जाता
जिस पर नज़र करुणा की पड़े, वो पार उतर जाता है
जिस पर नज़र करुणा की पड़े, वो पार उतर जाता है
दीन दुखियों के जीवन में, उजियारा छाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है॥
श्रेणी : कृष्ण भजन
चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है || Chalo Bulawa Aya Hai Radha Ne Bulaya Hai | Radha Rani Bhajan
यह भजन राधा रानी की महिमा, कृपा और प्रेम-भक्ति को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण कृष्ण भजन है। “चलो बुलावा आया है, राधा ने बुलाया है” पंक्ति भक्तों के लिए एक दिव्य निमंत्रण का प्रतीक है, जहाँ राधा रानी स्वयं अपने भक्तों को अपनी शरण में बुलाती हुई प्रतीत होती हैं। यह भजन आधुनिक भक्ति शैली में लोकप्रिय हुआ है, हालांकि इसके मूल रचयिता की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इस भजन का मुख्य भाव “राधा कृपा, प्रेम और शरणागति” है। इसमें बताया गया है कि जो भी सच्चे मन से राधा रानी को याद करता है, उसका “बेड़ा पार” हो जाता है, यानी जीवन की कठिनाइयाँ और आध्यात्मिक बाधाएँ दूर हो जाती हैं। बरसाना की गलियों को प्रेम और भक्ति की धारा से भरा बताया गया है, क्योंकि बरसाना राधा रानी की जन्मभूमि मानी जाती है और वैष्णव भक्ति में अत्यंत पवित्र स्थान है।
“राधा नाम की माला” और “नाम तुम्हारा अमृत जैसा” जैसी पंक्तियाँ नाम-स्मरण की महिमा को दर्शाती हैं। यहाँ राधा का नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, मार्गदर्शन और दुखों से मुक्ति का माध्यम माना गया है। “सूने दिल के आँगन में खुशियों के दीप जलती हैं” पंक्ति यह बताती है कि राधा की कृपा से जीवन में प्रेम, आशा और आनंद का प्रकाश भर जाता है।
भजन में “श्रीजी” शब्द भी आया है, जो राधा रानी के लिए श्रद्धापूर्वक प्रयोग किया जाता है। वैष्णव परंपरा में राधा को केवल कृष्ण की प्रिया ही नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम की सर्वोच्च शक्ति माना जाता है।
कुल मिलाकर, यह भजन भक्त को राधा रानी के नाम, उनकी कृपा और बरसाने की भक्ति भावना से जोड़ता है, और यह संदेश देता है कि सच्चे प्रेम और श्रद्धा से की गई पुकार कभी व्यर्थ नहीं जाती।