घनश्याम तेरी मुरली की कसम
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
हम तुमसे मोहब्बत करते हैं, हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
जब देखा तेरे नैनों को हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे,
जब देखा तेरे नैनों को हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे,
जब देखा दुनिया वालों को हम दिल से फैसला कर बैठे,
जब देखा दुनिया वालों को हम दिल से फैसला कर बैठे,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
जब देखा तेरे होठों को हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे,
जब देखा तेरे होठों को हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे,
जब देखा दुनिया वालों को हम दिल से फैसला कर बैठे,
जब देखा दुनिया वालों को हम दिल से फैसला कर बैठ,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
जब देखा तुमको बागों में हम फूल तोड़ना भूल गए,
जब देखा तुमको बागों में हम फूल तोड़ना भूल गए,
जब देखा दुनिया वालों को हम दिल से तुमसे मोहब्बत कर बैठे,
जब देखा दुनिया वालों को हम दिल से फैसला कर बैठे,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
हम तुमसे मोहब्बत करते हैं, हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं,
श्रेणी : कृष्ण भजन
कृष्ण भजन | घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहोबत करते हैं || Ghanshyam teri murli ki kasam
यह भजन भगवान श्री कृष्ण (घनश्याम) के प्रति गहरे प्रेम और आकर्षण को व्यक्त करता है। “घनश्याम तेरी मुरली की कसम हम तुमसे मोहब्बत करते हैं” एक मधुर कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त अपने हृदय की प्रेमभावना को सीधे भगवान के सामने प्रकट करता है। इस भजन के रचयिता के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे लोक-भक्ति और आधुनिक भजन शैली का मिश्रण माना जाता है।
इस भजन का मुख्य भाव “माधुर्य भक्ति” है, जिसमें भगवान को प्रियतम (Beloved) के रूप में देखा जाता है। यहाँ भक्त कृष्ण की सुंदरता, उनकी आँखों, मुस्कान और मुरली की मधुर धुन पर मोहित हो जाता है। “तेरी मुरली की कसम” पंक्ति कृष्ण की बांसुरी को प्रेम और दिव्य आकर्षण का प्रतीक बनाती है, क्योंकि कृष्ण की मुरली को भक्ति परंपरा में आत्मा को अपनी ओर खींचने वाली दिव्य पुकार माना गया है।
“जब देखा तेरे नैनों को हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे” और “जब देखा तुमको बागों में हम फूल तोड़ना भूल गए” जैसी पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि भगवान के सौंदर्य और प्रेम में डूबने के बाद संसार की बाकी चीज़ें महत्वहीन लगने लगती हैं। भक्त का मन पूरी तरह कृष्ण में खो जाता है।
भजन में बार-बार “हम तुमसे मोहब्बत करते हैं” दोहराया गया है, जो केवल सांसारिक प्रेम नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यह वही भाव है जो ब्रज भक्ति, गोपियों के प्रेम और मीरा बाई जैसी संत परंपराओं में दिखाई देता है।
कुल मिलाकर, यह भजन भगवान कृष्ण के प्रति निष्कपट प्रेम, आकर्षण और पूर्ण समर्पण की भावनाओं को बेहद सरल लेकिन गहराई से प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त अपने प्रेम को ही अपनी सबसे बड़ी पूजा मानता है।